प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अब केवल अधिकृत प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं को ही वीआईपी दर्शन की सुविधा दी जाएगी। मंदिर कमेटी, पुलिस और स्थानीय प्रशासन अगले एक-दो दिनों में इस नई प्रणाली को लागू करने की तैयारी में है।
नई व्यवस्था के अनुसार राजस्थान या अन्य राज्यों के राजभवन, केंद्रीय मंत्री कार्यालय अथवा सचिवालय जैसे अधिकृत कार्यालयों की सिफारिश के आधार पर ही वीआईपी दर्शन की अनुमति दी जाएगी। सिफारिश पत्र की जांच के बाद श्रद्धालुओं का विवरण डिजिटल सिस्टम में दर्ज किया जाएगा और फिर क्यूआर कोड के साथ दर्शन का समय निर्धारित किया जाएगा।
व्हाट्सएप बॉट से बनेगा क्यूआर कोड
सिफारिश पत्र की सत्यता जांचने के बाद संबंधित श्रद्धालुओं का पूरा विवरण विशेष व्हाट्सएप बॉट में दर्ज किया जाएगा। इसके बाद क्यूआर कोड और दर्शन का समय जनरेट कर संबंधित सिफारिशी कार्यालय को भेजा जाएगा। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आधार कार्ड साथ रखना अनिवार्य होगा। प्रवेश द्वार पर क्यूआर कोड स्कैन करने और पहचान पत्र की जांच के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।
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बाबा पार्किंग वाला पुराना VIP गेट होगा बंद
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मंदिर के पास स्थित बाबा पार्किंग वाला पुराना वीआईपी गेट बंद कर दिया जाएगा। प्रोटोकॉल के तहत आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश मार्ग निर्धारित किया जाएगा और दर्शन के बाद उन्हें उसी मार्ग से बाहर निकाला जाएगा। हालांकि आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और आईआरएस अधिकारी यदि स्वयं दर्शन के लिए आते हैं तो उन्हें किसी सिफारिश पत्र की आवश्यकता नहीं होगी। वे जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क कर दर्शन कर सकेंगे। राजस्थान सरकार के मंत्रियों, अन्य राज्यों के मंत्रियों और सांसदों को भी बिना सिफारिश पत्र सीधे दर्शन की अनुमति दी जाएगी।
ठगी रोकने के लिए लिया गया फैसला
गौरतलब है कि खाटूश्यामजी मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूर्व में वीआईपी दर्शन के नाम पर ठगी, लपका गिरोह की गतिविधियों, मारपीट और धक्का-मुक्की जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। इन्हीं घटनाओं पर रोक लगाने और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए मंदिर कमेटी, प्रशासन और पुलिस ने नई प्रणाली लागू करने का फैसला किया है।
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद वीआईपी दर्शन का पूरा रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस अधिकृत कार्यालय की सिफारिश पर कितने श्रद्धालुओं को वीआईपी दर्शन की अनुमति दी गई।