सीरिया, इराक समेत अन्य देशों में आतंकी संगठन आईएस की फंडिंग करने वाले सीकर के जमील अहमद की जांच अब एनआईए करेगी। गुरुवार को राजस्थान हाई कोर्ट में जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए एनआईए के एडवोकेट टीपी शर्मा ने अदालत से एक महीने का समय मांगा।
एनआईए के एडवोकेट टीपी शर्मा ने कोर्ट से कहा- मामला जांच के लिए उनके पास आ रहा है। इसलिए 1 महीने का समय दें, ताकि केस की फाइल आ जाए और वह अपना वकालतनामा पेश कर दें। राज्य सरकार के एएजी राजेश महर्षि ने कहा सरकार ने मामला एनआईए को भेजने के लिए पत्र लिखा है। इस मामले में 2 देशों में जांच बाकी है। जहां जमील ने रुपए भेजे थे और वहां से प्राप्त किए थे।
कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनकर 27 जुलाई तक सुनवाई टाली
जमील अहमद की ओर से कहा गया था कि उसके उसके सह आरोपी इकबाल की जमानत हो चुकी है। मामले में पहले ही दो बार तारीखें दी जा चुकी हैं। इसलिए जमानत अर्जी पर बहस सुनी जाए। सरकार की ओर से कहा गया कि दोनों का मामला अलग-अलग है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनकर 27 जुलाई तक सुनवाई टाल दी।
एसओजी ने नवंबर 2016 में जमील अहमद को किया था गिरफ्तार
एसओजी ने नवंबर 2016 में जमील अहमद को गिरफ्तार किया था और 2017 में उसके खिलाफ चालान पेश किया था। वह जयपुर की सेंट्रल जेल में बंद है। जयपुर की निचली कोर्ट ने 11 नवंबर 2020 को उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। जिसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है।
2 टाडा अभियुक्तों की पैरोल पर केंद्र देगा जवाब
राजधानी एक्सप्रेस में साल 1993 में हुए सीरियल बम धमाके मामले में सजायाफ्ता टाडा अभियुक्त मोहम्मद एजाज अकबर और शमसुद्दीन की पैरोल याचिका पर केंद्र सरकार 27 जुलाई को राजस्थान हाईकोर्ट में जवाब देगी। दोनों की पैरोल याचिका पर गुरुवार को जस्टिस अशोक गौड़ और आशुतोष कुमार की खंडपीठ में सुनवाई हुई। अभियुक्तों ने कहा कि अन्य की तरह उन्हें भी पैरोल मिले। इस पर केंद्र सरकार ने पैरोल का विरोध करते हुए कहा कि वह याचिका में जवाब देंगे। कोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई 27 जुलाई को तय की है।