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रणथंभौर टाइगर रिजर्व: बढ़ती बाघों की संख्या वन विभाग के लिए चुनौती, सीमा संघर्ष और मानव-बाघ टकराव में इजाफा

Mon, 06 Apr 2026 10:11 PM IST
सवाई ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर

सार

Ranthambore Tiger Population: रणथंभौर में 76 से अधिक बाघों की संख्या के कारण अधिकार क्षेत्र में कमी हो रही है, जिससे इलाके को लेकर आपसी संघर्ष तथा मानव-बाघ टकराव की घटनाओं में वृद्धि हुई है। वन विभाग द्वारा घास के मैदानों के विकास, वन्यजीव गलियारों और बाड़ों के निर्माण पर कार्य किया जा रहा है।
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रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या से उभरी चुनौती - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व में लगातार बढ़ती बाघों की संख्या अब वन विभाग के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। करीब 45 से 55 बाघों की क्षमता वाले इस रिजर्व में वर्तमान में लगभग 76 से अधिक बाघ, बाघिन और शावक मौजूद हैं, जिससे उनके लिए इलाके की कमी महसूस होने लगी है। बढ़ती संख्या के कारण बाघों के बीच आपसी टकराव के मामले भी बढ़ रहे हैं और कई बाघ इलाकों की तलाश में जंगल की सीमा से बाहर निकल रहे हैं।

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बाघों की बढ़ती संख्या और घनत्व का दबाव
रणथंभौर को बाघों की नगरी और नर्सरी के रूप में जाना जाता है, जहां बाघों की स्वछंद गतिविधियों ने इसे विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है। हालांकि वर्तमान में यहां बाघों का घनत्व काफी अधिक हो गया है। रणथंभौर का क्षेत्रफल पहले 1334 वर्ग किलोमीटर था, जिसे बढ़ाकर लगभग 1700 वर्ग किलोमीटर किया गया, लेकिन इसके बावजूद बाघों के लिए जगह कम पड़ रही है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार यह क्षेत्र 45 से 55 बाघों के लिए उपयुक्त माना गया था।
 
जोन 1 से 5 में सर्वाधिक दबाव
रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह के अनुसार वर्तमान में यहां करीब 21 नर, 20 मादा और 15 से अधिक शावक हैं, जबकि दूसरे डिवीजन में भी 10 से अधिक बाघ-बाघिन और शावक मौजूद हैं। विशेष रूप से जोन नम्बर एक से पांच तक लगभग 70 प्रतिशत बाघ निवास करते हैं, जिसके कारण इस क्षेत्र में दबाव और संघर्ष की स्थिति अधिक है। इसी कारण रणथंभौर को देश का सबसे अधिक बाघ घनत्व वाला टाइगर रिजर्व माना जाता है।
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टेरेटरी की कमी से बढ़ रहे संघर्ष
बाघों की संख्या बढ़ने के साथ इलाकों को लेकर आपसी संघर्ष भी बढ़ता जा रहा है। डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि इस संघर्ष में कई बार बाघ घायल भी हो जाते हैं। इलाके की तलाश में कई बाघ रणथंभौर की परिधि से बाहर निकल रहे हैं, जिससे वन विभाग की चिंता और बढ़ गई है।
 
समाधान के लिए घास के मैदान और गलियारे पर काम
वन विभाग द्वारा बाघों के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। रणथंभौर में 500-500 हेक्टेयर के घास के मैदान विकसित किए गए हैं और आगे भी यह प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही रणथंभौर-कैलादेवी गलियारा और रामगढ़ विषधारी इंदरगढ़ लाखेरी गलियारे को विकसित किया जा रहा है, ताकि बाघों को आवागमन और इलाके के लिए पर्याप्त जगह मिल सके।
 
बाड़े और सफारी पार्क की योजना
डीएफओ ने बताया कि मुकुन्दरा टाइगर हिल्स की तर्ज पर बड़े बाड़े की आवश्यकता है, जहां घायल और बुजुर्ग बाघों को रखा जा सके। आईओसी लैंड पर बाड़ा और सफारी पार्क विकसित करने का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है, जिससे बाघों को अतिरिक्त स्थान और निगरानी की सुविधा मिल सके।

पढ़ें- रणथंभौर में फर्जी सफारी: बिना वैध टिकट पर्यटकों को घुमाने के मामले में गाइड-चालक पर कार्रवाई, कैसे हुआ खुलासा?
 
मानव-बाघ संघर्ष में भी बढ़ोतरी
बढ़ती संख्या के कारण बाघों का जंगल से बाहर आना बढ़ा है, जिससे मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच 15 महीनों में बाघ हमलों में तीन लोगों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें 16 अप्रैल 2025 को एक बालक, 11 मई 2025 को रेंजर देवेंद्र चौधरी और 09 जून 2025 को राधेश्याम माली की मृत्यु शामिल है।
 
गलियारे में बाधाएं और हादसे
रणथंभौर से बाहर निकलने वाले बाघ करौली, बूंदी और कोटा के क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन रास्ते में हाइवे और रेलवे ट्रैक जैसी बाधाओं के कारण हादसे भी हो रहे हैं। पूर्व में टूटी पूंछ वाले बाघ की ट्रेन से टकराकर मौत हो चुकी है। सुल्तान टी-72 और तूफान टी-80 जैसे बाघ भी रणथंभौर से करौली तक जा चुके हैं।
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चीता शावक का सफल रेस्क्यू
इसी बीच रणथंभौर टाइगर रिजर्व के कुशालीपुरा रेंज में एक मादा चीता शावक का सफल रेस्क्यू किया गया। करीब 6 माह की यह शावक अपनी मां से बिछड़कर निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) की स्थिति में मिली थी। बचाव टीम के जसकरण मीणा द्वारा उसे सुरक्षित लाकर वन्यजीव चिकित्सालय में उपचार कराया गया। उप वन संरक्षक मानस सिंह के निर्देशन में और डॉ. चंद्र प्रकाश मीणा की देखरेख में फ्लूड और ऑक्सीजन थेरेपी देने के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ। बाद में उसे उसकी मां के संभावित क्षेत्र में छोड़ दिया गया।


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