राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े
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समारोह के दौरान उन्होंने अपने उद्बोधन में महाराणा प्रताप को शौर्य, त्याग, तपस्या, बलिदान और राष्ट्र का जीता जागता उदाहरण बताया। वीर शिरोमणि प्रताप ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने महलों और शहर त्याग कर दिया। उन्होंने जंगल में भटकना स्वीकार किया। लेकिन मुगलों की गुलामी स्वीकार नहीं की।
यादें ताजा करते हुए ली चाय की चुस्की
428वीं महाराणा प्रताप समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े सगतडा गांव पहुंचे। जहां करीब 40 साल पुराने मित्रों से आत्मीय मुलाकात की। साथ ही पुरानी यादें ताजा करते हुए नरेंद्र जोशी के साथ बातचीत की और कुशलक्षेम पूछी। इससे पूर्व राज्यपाल के पहुंचने पर हेमराज जोशी के घर पर मेवाड़ी रिवाज में स्वागत किया गया।
उन्होंने अपने पुराने मित्र स्वर्गीय भगवान जोशी के पुत्र मोहन जोशी और हरिराम जोशी से मिले व हालचाल जाना। करीब 12 मिनट तक रुके और अपने परिचितों के साथ मराठी भाषा में चाय के साथ चर्चा की। गौरतलब है कि अपनी राजनीति में आने से पहले किसान थे। जब खेत से निकली हुई सब्जियों को मंडी में बेचने के लिए जाते थे। तब उनकी मुलाकात जोशी परिवार से संभाजी नगर (महाराष्ट्र) में हुई थी। जोशी परिवार वहां पर होटल व्यवसाय करता था, जहां राज्यपाल बागड़े उनके होटल पर आते थे और तब से उनकी मित्रता हुई थी।
राज्यपाल बागड़े ने महाराणा प्रताप समाधि स्थल पर पुष्पांजलि करने से पहले हेलीपैड से सीधा चावंड स्थित महाराणा प्रताप की आराध्य देवी चामुंडा माता मंदिर पहुंचे। जहां पर राज्यपाल बागड़े ने दर्शन किया।