मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने साधु-संतों से की बात।
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भरतपुर जिले में 551 दिन से चल रहा साधु-संतों का आंदोलन खत्म हो गया। आंदोलन कर रहे साधु-संतों से बात करने के लिए मंत्री विश्वेंद्र सिंह सहित अन्य आलाअधिकारी पहुचे थे। पर्यटन मंत्री ने साधु-संतों से वादा करते हुए कहा कि 15 दिन में उक्त क्षेत्र को वन क्षेत्र घोषित किया जाएगा। मंत्री के साथ बुधवार शाम जिला कलेक्टर आलोक रंजन और अन्य प्रशासनिक अधिकारी धरना स्थल पासोपा पहुंचे थे। यहां दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता सफल रही।
जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने सभी साधु-संतों और ग्रामीणों को सरकारी आदेश पढ़कर भी सुनाया। जिसके तहत 15 दिन में आदिबद्री धाम और कनकांचल पर्वत क्षेत्र को सीमांकित कर वन क्षेत्र घोषित किया जाएगा।
दो महीने में दोनों स्थानों पर संचालित वैध खदानों को अन्य स्थान पर पुनर्वासित करने की योजना भी बनाएगी। इस दौरान रंजन ने कहा कि सरकार देवस्थान, पर्यटन और वन विभाग के साथ विचार विमर्श इन क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम करेगी। इसके बाद साधु-संतों ने धरना समाप्त कर दिया।
बता दें कि अवैध खनन के विरोध में साधु-संत 551 दिन से आंदोलन कर रहे थे। बुधवार को बड़ी संख्या में साधु-संत पासोपा में आंदोलन स्थल पर जुट गए। इस दौरान सुबह करीब 11.30 बजे संत विजयसदास (65) ने धरनास्थल के पीछे जाकर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर खुद को आग लगा ली। जयपुर के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है उनका 80 फीसदी शरीर जल गया है।