मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को अपने निवास पर चिकित्सा विभाग की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने एक अप्रैल से शुरू की गई मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी सहित अन्य इस योजना को सफल बनाने में जुटें। यह भी सुनिश्चित करें कि रोगियों को निशुल्क उपचार लेने में किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े। यह हम सबका प्राथमिक दायित्व होना चाहिए।
सीएम ने कहा कि चिकित्सा का क्षेत्र राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यही वजह है कि हमारी सरकार ने मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना और मुख्यमंत्री निशुल्क निरोगी राजस्थान योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं प्रारम्भ की हैं। इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेशवासी इलाज के खर्च से चिंता मुक्त रहेंगे। साथ ही राजस्थान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इन योजनाओं का जमीनी स्तर तक पूरी प्रतिबद्धता से क्रियान्वयन हो।
प्रति परिवार दस लाख रुपये का बीमा
गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार ‘राइट टू हेल्थ’ की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। राइट टू हेल्थ बिल को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। इसमें मरीजों के हित में सभी जरूरी प्रावधान किए जाएं। उन्होंने कहा कि हमारी पिछली सरकार के समय मुख्यमंत्री निशुल्क दवा और जांच योजना लागू की गई थी। हमने हर परिवार को इलाज के खर्च से चिंतामुक्त करने की दिशा में मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा जैसी महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। इस बजट सत्र में इसका दायरा बढ़ाते हुए प्रति परिवार बीमा 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है।