मिलिट्री स्कूल के बाहर रखे गए टैंक।
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राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल के प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल श्याम कृष्णा टीपी ने बताया, टी -55 टैंक् का इतिहास बहुत खास व पुराना है। सोवियत काल के समय के यह वही रूसी टैंक हैं,जिनका उपयोग भारत द्वारा पाकिस्तान के साथ 1965 और 1971 के युद्धों में किया गया थाI टी 55 युद्धक टैंक, जिनमें से प्रत्येक टैंक का वजन लगभग 40 टन है, और 105 मि.मी. राइफल बंदूकों से सुसज्जित हैं और यह परमाणु, जैविक और रासायनिक (एनबीसी) हथियारों के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान करते हैं I राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल के परिसर में पहले से ही एक विजयांत्ता युद्धक टैंक और मिग २१ से सुसज्जित है। अब ये दो टैंक स्कूल को सुशोभित करेंगे। प्रधानाचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल श्याम कृष्णा टी. पी. ने कहा, की टैंक् 'टी-55 न केवल कैडेटों के लिए बल्कि आम जनता के लिए भी प्रेरणादायक होंगे और ये टैंक् स्कूल के साथ-साथ धौलपुर जिले की भी शोभा बढ़ाएंगे।
पर्यटकों के लिए रहेंगे आकर्षण का केंद्र
धौलपुर जिले में चंबल के बीहड़, तालाब-शाही एवं ऐतिहासिक तीर्थराज मचकुंड को देखने के लिए देश के कोने कोने से बेशुमार पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए दोनों टैंक को राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल के मुख्य द्वार पर रखा गया है। पर्यटकों को दोनों टैंक के अवलोकन करने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही धौलपुर में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।