राजस्थान में बाल विवाह, आटा-साटा जैसी कई कुप्रथाएं हैं, जिसकी आग में अबतक लड़कियां जल रही हैं। इन्हीं कुप्रथाओं में से एक कुकड़ी प्रथा भी है, जिसमें महिलाओं को अपनी पवित्रता साबित करनी पड़ती है। फेल होने पर पंच लड़की और उसके मां-बाप पर लाखों रुपये का अर्थदंड लगाते हैं।
शुक्रवार को पंचायत में होगा दंड का एलान
इस मामले की सबसे अजीब बात यह है कि जातीय पंच पीड़िता को ही दोषी मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार सांसी समाज में कुकड़ी प्रथा के नाम पर शुक्रवार को पीड़ित के ससुराल में पंच पटेलों की जातीय पंचायत होगी। उस जातीय पंचायत में समाज के पंच पटेल पीड़ित के परिवार पर आर्थिक दंड तय करेंगे।
राजस्थान में सांसी समाज में कुकड़ी प्रथा का चलन लंबे समय से चला आ रहा है। यह ऐसी कुप्रथा है, जिसमें महिलाओं को अपनी पवित्रता यानी वर्जिनिटी का प्रमाण देना पड़ता है। सुहागरात के दिन पति अपनी पत्नी के पास एक सफेद चादर लेकर आता है। जब वह शारीरिक संबंध बनाता है तो उस चादर पर खून के निशान को अगले दिन समाज के लोगों को दिखाया जाता है। यदि खून के निशान आ गए तो उसकी पत्नी पवित्र मानी जाती है। यदि उस चादर पर खून के निशान नहीं आए तो जातीय पंचायत के पंच पटेल लड़की के परिवार से अधिक दहेज मांगते हैं। कई बार लड़की के घरवाले को समाज से बहिष्कृत किया जाता है और समाज मे शामिल करने के लिए परिवार पर आर्थिक दंड लगाया जाता है।
कोई भी लड़की कुकड़ी प्रथा में दोषी पाई जाती है तो जातीय पंचायत उस लड़की के परिवार पर आर्थिक जुर्माना लगाती है। कई बार यह रकम 5 से 10 लाख रुपए होती है। ऐसे में पीड़ित परिवार को जमीन और घर तक बेचना पड़ जाता है। अगर जुर्माने की राशि परिवार नहीं देता है तो उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है।