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Rajasthan News: लोकलाज में दुष्कर्म की बात छिपाई तो शादी के बाद वर्जिनिटी टेस्ट में फेल हुई, अब मिलेगी सजा

Thu, 26 May 2022 05:07 PM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा

सार

भीलवाड़ा के सांसी समाज में नई दुल्हनों को वर्जिनिटी का टेस्ट पास करना होता है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें दंड सुनाया जाता है। इस बार गांव के पंच एक दुष्कर्म पीड़िता को सजा सुनाने की तैयारी में है।
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कुकड़ी प्रथा - फोटो : Social Media
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विस्तार
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राजस्थान में बाल विवाह, आटा-साटा जैसी कई कुप्रथाएं हैं, जिसकी आग में अबतक लड़कियां जल रही हैं। इन्हीं कुप्रथाओं में से एक कुकड़ी प्रथा भी है, जिसमें महिलाओं को अपनी पवित्रता साबित करनी पड़ती है। फेल होने पर पंच लड़की और उसके मां-बाप पर लाखों रुपये का अर्थदंड लगाते हैं।

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जिले में कुकड़ी प्रथा की भेंट इस बार एक दुष्कर्म पीड़िता चढ़ी है। जिसे दोषी मानकर जातीय पंचायत दंड देने के तैयारी में हैं। भीलवाड़ा के सांसी समाज की एक युवती के साथ उसी के पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने दुष्कर्म किया। आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने दबाव में आकर किसी को कुछ नहीं बताया लेकिन घटना के कुछ दिन बाद उस युवती की शादी हुई। इसके बाद समाज में प्रचलित कुकड़ी कुप्रथा के तहत युवती को दोषी पाया गया। तब लड़की ने अपने साथ हुई ज्यादती के बारे में बताया। इसके बाद परिजनों ने आरोपी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया है।


शुक्रवार को पंचायत में होगा दंड का एलान
इस मामले की सबसे अजीब बात यह है कि जातीय पंच पीड़िता को ही दोषी मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार सांसी समाज में कुकड़ी प्रथा के नाम पर शुक्रवार को पीड़ित के ससुराल में पंच पटेलों की जातीय पंचायत होगी। उस जातीय पंचायत में समाज के पंच पटेल पीड़ित के परिवार पर आर्थिक दंड तय करेंगे।

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क्या है कुकड़ी प्रथा

राजस्थान में सांसी समाज में कुकड़ी प्रथा का चलन लंबे समय से चला आ रहा है। यह ऐसी कुप्रथा है, जिसमें महिलाओं को अपनी पवित्रता यानी वर्जिनिटी का प्रमाण देना पड़ता है। सुहागरात के दिन पति अपनी पत्नी के पास एक सफेद चादर लेकर आता है। जब वह शारीरिक संबंध बनाता है तो उस चादर पर खून के निशान को अगले दिन समाज के लोगों को दिखाया जाता है। यदि खून के निशान आ गए तो उसकी पत्नी पवित्र मानी जाती है। यदि उस चादर पर खून के निशान नहीं आए तो जातीय पंचायत के पंच पटेल लड़की के परिवार से अधिक दहेज मांगते हैं। कई बार लड़की के घरवाले को समाज से बहिष्कृत किया जाता है और समाज मे शामिल करने के लिए परिवार पर आर्थिक दंड लगाया जाता है।


परिजनों की बिक जाती है पुरखों की जमीन

कोई भी लड़की कुकड़ी प्रथा में दोषी पाई जाती है तो जातीय पंचायत उस लड़की के परिवार पर आर्थिक जुर्माना लगाती है। कई बार यह रकम 5 से 10 लाख रुपए होती है। ऐसे में पीड़ित परिवार को जमीन और घर तक बेचना पड़ जाता है। अगर जुर्माने की राशि परिवार नहीं देता है तो उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है। 

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