सात अगस्त की शाम जयपुर के बुद्धिजीवियों, लेखकों और पत्रकारों का जमावड़ा पिंकसिटी प्रेस क्लब में हुआ। सभी ने हिंदी के श्रेष्ठतम संपादकों और विचारकों में से एक राजेंद्र माथुर को शिद्दत से याद किया। उनके जन्मदिवस के अवसर पर मेरी फिल्म 'कलम का महानायक' का प्रदर्शन हुआ। यह फिल्म स्व. माथुर जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित है। मुंबई से आए वरिष्ठ पत्रकार हरीश पाठक के शोधपरक ग्रंथ 'आंचलिक अखबारों की राष्ट्रीय भूमिका' पर भी चर्चा हुई। जाने-माने पत्रकार और लेखक ईश मधु तलवार कार्यक्रम के सूत्रधार-संचालक बने।
प्रेस क्लब के अध्यक्ष अभय जोशी और महासचिव मुकेश चौधरी आयोजन के लिए साधुवाद का हक रखते हैं। इसके अलावा मीडिया समालोचक कल्याण कोठारी, मीडिया विशेषज्ञ और मुख्यमंत्री के सलाहकार फारूक आफरीदी, विशेषज्ञ हरीश करम चंदानी, सीमासंदेश के श्रीधर शर्मा, कलमकार मंच के निशांत मिश्रा, नीलम मुंजाल, लेखिका उमा जी, रजनी मोरवाल, कवयित्री जयश्री कंवर के साथ मुंबई आकाशवाणी से दशकों संबद्ध रहीं हरीश पाठक की पत्नी श्रीमती कमलेश पाठक और मेरी श्रीमती प्रो. मीता बादल की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
लेकिन खास मौजूदगी उन पुराने साथियों और पत्रकारों की रही, जिन्होंने राजेंद्र माथुर के नेतृत्व में गुलाबी शहर से समाचार पत्र की शुरुआत की। उन दिनों मैं भी मुख्य उप संपादक के तौर पर इस टीम का हिस्सा रहा। इन साथियों में अव्वल तो तलवार जी खुद थे, जिन्होंने बतौर चीफ रिपोर्टर अखबार की पत्रकारिता को तेवर दिए। संचालन के दरम्यान उस दौर की पत्रकारिता और माथुर जी से जुड़े अनुभवों के खजाने से कुछ मोती उन्होंने निकाले।
उन दिनों जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान से अखबार को अनेक चौंकाने वाली कथाएं देने वाले साथी संजय सिंढायच भी जापान से आए। संजय इन दिनों जापान में तिरंगा लहरा रहे हैं। इसके अलावा महेश शर्मा सपरिवार पधारे। तेज तर्रार पत्रकारिता से कभी राजस्थान की सरकार को हिलाने वाले महेश झालानी ने भी अखबार और माथुर जी से जुड़े संस्मरण सुनाए। कैलाश शर्मा जो इन दिनों पत्रकारिता के अलावा सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं, उन्होंने भी अपनी यादों का पिटारा खोला।
साथी गजेंद्र रिझवानी अस्वस्थता के बावजूद पुत्र के साथ आए। उनके अनुभव दिलचस्प थे। साथी रामबाबू सिंघल के हवाले से उस दौर को याद करना अदभुत था। इसके अलावा मैंने और हरीश पाठक ने भी आंचलिक पत्रकारिता को लेकर राजेंद्र माथुर की संवेदनशीलता और सरोकारों पर अपने विचार साझा किए। शहर के अनेक बुद्धिजीवी और पत्रकारों ने इसमें शिरकत की और प्रेस क्लब में इस तरह की रचनात्मक पहल को सराहा।