राजस्थानी युवा समिति की राजस्थानी को राजभाषा बनाने की लड़ाई एक पायदान ऊपर चढ़ गई है। राजस्थानी भाषा को राजस्थान की द्वितीय राजभाषा घोषित करने के संबंध में एक समिति के गठन का अनुमोदन किया गया है। यह समिति छत्तीसगढ़ और झारखंड के मॉडल का अध्ययन कर वहां की तर्ज पर राजस्थानी भाषा को मान्यता देने के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
राजस्थानी युवा समिति के राष्ट्रीय सलाहकार राजवीर सिंह चलकोई ने इसका श्रेय अपने एक लाख से अधिक युवा सदस्यों और करोड़ों राजस्थानियों को दिया है। जागरुकता और जनचेतना की इस कड़ी में चलकोई 23 और 24 मार्च को उदयपुर में होने वाले भाषा का मेला कार्यक्रम में राजस्थानी भाषा पर सेशन लेंगे।
समिति के संस्थापक हिमांशु किरण शर्मा ने बताया कि वर्तमान विधानसभा सत्र में ही ये काम हो सके, इसलिए पूरी टीम 25 दिन जयपुर में डेरे डालकर बैठी रही, पर जब मुख्यमंत्री वादा करके भी मिलने का टाइम नहीं दे रहे थे, तब इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने के लिए समिति ने उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ से गुहार लगाई।
उन्होंने कहा कि जब तक सरकार राजस्थानी को राजभाषा का दर्जा नहीं दे देती, तब तक समिति रुकेगी नहीं। हिमांशु राजस्थान दिवस पर कार्यक्रम में राजस्थानी के लिए बात करेंगे।
समिति अध्यक्ष अरुण राजपुरोहित ने बताया कि ये ऐतिहासिक वर्ष है। राजस्थानी भाषा के लिए पहले समिति राजभाषा बनाने के लिए लड़ेगी। सचिव अरविंद जोशी ने बताया कि समिति लगातार केंद्र सरकार के मंत्रियों से भी संपर्क में है और 8वीं अनुसूची में जोड़ने के लिए भी माहौल तैयार कर रही है। सह सचिव अविनाश पुरोहित ने बताया कि युवा मिलकर इस बार राजस्थानी को मान्यता दिलवाने का मन बना चुके हैं।