सचिन पायलट-अशोक गहलोत (फाइल फोटो)
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राजस्थान में बगावती सुर अपनाए सचिन पायलट और उनके समर्थक 18 विधायकों की पार्टी में वापसी सुनिश्चित होने के बाद भाजपा ने गुरुवार को चौंकाने वाला एलान किया कि वह अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। गुरुवार को भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ हुई विधायकों की बैठक में यह फैसला किया गया था। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे भी शामिल हुई थीं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने के फैसले का संख्याबल से कोई लेना देना नहीं है। भाजपा जानती है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास बहुमत है और उनकी योजना विश्वास मत कायम करने की है जिससे उन्हें छह महीने के लिए राहत मिल जाएगी। भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव की बात कहकर गहलोत की योजना को विफल करने का प्रयास किया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है, 'हमने उनके विश्वास मत का जवाब अविश्वास प्रस्ताव से दिया है।' हालांकि, इस मामले में नियम कुछ और कहते हैं। नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री का विश्वास मत किसी भी अन्य मत पर भारी पड़ता है। सूत्रों के अनुसार भाजपा को सदन में मत के दौरान पायलट खेमे के यू टर्न लेने की भी कोई संभावना नहीं दिख रही है।
कांग्रेस को मुद्दों पर घेरना चाहती है भाजपा
भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी की रणनीति बहस करने की और कोरोना वायरस महामारी समेत विभिन्न मुद्दों पर गहलोत सरकार को घेरकर पीछे धकेलने की है। इस प्रक्रिया में पार्टी कांग्रेस की कमियों को उजागर करने की उम्मीद में है। भाजपा का मानना है कि सचिन पायलट की वापसी के बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर गहरी दरारें बनी हुई हैं और यह अगले संकट से महज कुछ समय पहले की बात भर है।
विधानसभा का गणित गहलोत के पक्ष में
बता दें कि पायलट की वापसी के साथ ही कांग्रेस की विधानसभा में संख्या 107 हो गई है। सभी 13 निर्दलीय विधायक भी कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं और छोटे दलों के समर्थन के साथ गहलोत के पास 125 विधायकों का संख्या बल है। 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में 101 बहुमत का आंकड़ा है। वहीं, भाजपा इस आंकड़े से बहुत दूर है, उसके पास महज 75 विधायक हैं।