राजस्थान में शिक्षा और डिग्रियों के नाम पर विद्यार्थियों से ठगी के 23 मामलों में वांछित 35 हजार रुपये के इनामी आरोपी कल्याण सिंह को पुलिस ने देहरादून से गिरफ्तार किया है। आरोपी 18 साल से फरार था और अपनी पहचान छिपाकर 17 राज्यों में ठिकाने बदलता रहा। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए वाई-फाई तकनीशियन का वेश धरा।
विद्यार्थियों को शिक्षा और डिग्रियों के नाम पर ठगकर फरार हुए 35 हजार रुपये के इनामी आरोपी को जयपुर रेंज साइबर सेल और सीकर कोतवाली पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस टीम ने 18 साल से चकमा दे रहे 56 वर्षीय आरोपी कल्याण सिंह को उत्तराखंड के देहरादून से पकड़ा। आरोपी के घर में घुसने के लिए पुलिस को वाई-फाई तकनीशियन का वेश धरना पड़ा। आरोपी सीकर कोतवाली क्षेत्र में दर्ज धोखाधड़ी के 23 मामलों में लंबे समय से वांछित चल रहा था। अपनी लंबी फरारी के दौरान उसने देश के 17 राज्यों में लगातार अपने ठिकाने बदले थे।
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फाइबर कनेक्शन बना गिरफ्तारी का रास्ता
पुलिस महानिरीक्षक राहुल प्रकाश ने बताया कि आरोपी की तलाश के लिए दिल्ली, रुड़की और देहरादून समेत कई स्थानों पर लगातार प्रयास किए जा रहे थे। मुखबिर से मिली सूचना के विश्लेषण के बाद पुलिस को आरोपी के देहरादून के प्रेमनगर स्थित राघव विहार में रहने का पता चला।
आरोपी के मकान के पास एयरटेल फाइबर कनेक्शन उपलब्ध होने का फायदा उठाकर पुलिसकर्मी 10 अक्तूबर को तकनीशियन बनकर उसके घर पहुंचे। आरोपी के घर के भीतर मौजूद होने की पुष्टि होते ही टीम ने दबिश दी और उसे दबोच लिया। इसके बाद आरोपी को सीकर लाकर कोतवाली पुलिस के सुपुर्द किया गया।
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17 राज्यों में ठिकाने बदले, कोचिंग संस्थानों में पढ़ाकर किया गुजारा
प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि आरोपी पर बीएड और अन्य शैक्षणिक डिग्रियों के नाम पर विद्यार्थियों से भारी रकम हड़पने के आरोप हैं। आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद वह फरार हो गया था। फरारी के दौरान उसने अलीगढ़, आंध्र प्रदेश, हैदराबाद, दिल्ली और दक्षिण भारत के विभिन्न कॉरपोरेट कोचिंग संस्थानों में विद्यार्थियों को पढ़ाकर अपना गुजारा किया।
वर्ष 2016 में उसने देहरादून के राघव नगर में एक मकान खरीद लिया था और वहीं रहने लगा था। जालोर के भीनमाल स्थित बोरट निवासी इस आरोपी से सीकर कोतवाली पुलिस अब आगे की जांच और कार्रवाई कर रही है।