अशोक गहलोत और सचिन पायलट
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2020 में सब्र खो बैठे पायलट
पार्टी में मांगें पूरी नहीं होने पर सचिन पायलट सब्र खो बैठे और अपने गुट के 18 विधायकों के साथ मानेसर चले गए। हालांकि, बाद में उनकी वापसी हो गई, लेकिन उन्हें उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। तब से पायलट सिर्फ विधायक ही हैं। अब गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की चर्चा शुरू हुई तो राहुल गांधी ने एक बार फिर पायलट को सीएम बनाने के संकेत दिए, लेकिन गहलोत गुट के विधायकों की खिलाफत से एक बार फिर सचिन पायलट सीएम की कुर्सी पर बैठते-बैठते रह गए। यानी राहुल गांधी इस बार भी अपना वादा नहीं निभा पाए।
सीएम बदला को सरकार गिरना तय
बीते दिनों राजस्थान की घटना पर सोनिया गांधी से माफी मांगे अशोक गहलोत माफीनामें के साथ सचिन पायलट की शिकायतों का पुलिंदा भी लेकर गए थे। ऐसे में साफ है कि सचिन पायलट और सीएम की कुर्सी के बीच अशोक गहलोत और उनके गुट के विधायक खड़े हैं। रविवार को भी गहलोत ने कहा कि दूसरों को नेता स्वीकार करने से अच्छा विधायकों ने बगावत करना उचित समझा। हमें भाजपा नेताओं के साथ बैठने वाले स्वीकार नहीं हैं। इससे साफ है कि गहलोत पायलट को सीएम बनाने की बात पर किसी भी तरह राजी नहीं होंगे और न ही उनके विधायक इसके लिए तैयार हैं। इसके बाद भी अगर कांग्रेस आलाकमान ने सीएम बदलने का फैसला किया तो सरकार भी खतरे में आ सकती है। कई बार गहलोत गुट के विधायक इसकी चेतावनी भी दे चुके हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
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चेतावनी के बाद भी बयानबाजी कर रहे नेता
राजस्थान में हुए सियासी घमासान के बाद कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी नेताओं के लिए एक नोटिस जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि पार्टी का कोई भी नेता एक दूसरे के खिलाफ बयान नहीं देगा। इसके बाद भी नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं। जयपुर के गांधी सर्किल पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के बाद सीएम अशोक गहलोत ने ही पायलट के खिलाफ बयान दे दिया। इससे गहलोत और पायलट की अदावत का अंत होता नहीं दिख रहा हैं।
जानिए अजय माकन की पांच गलतियां।
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अजय माकन की पद से हो सकती है छुट्टी
राजस्थान के सियासी घमासान में प्रदेश प्रभारी अजय माकन बुरी तरह फंस गए हैं। कभी भी उनसे इस्तीफा लिया जा सकता है। उनका प्रभारी पद से हटना तय माना जा रहा है। इससे पहले सचिन पायलट की बगावत के बाद राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे को भी पद से हटा दिया गया था। इस बार अजय माकन के साथ ऐसा हो सकता है।
जानें माकन से इस्तीफा लेने के पांच कारण?
सचिन पायलट का हो रहा विरोध।
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राहुल पायलट के सब्र के मुरीद, क्या 26 महीने बाद अब मिलेगी जिम्मेदारी?
22 जून को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली में एआईसीसी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 2004 से पार्टी में काम कर रहा हूं। सब्र नहीं आएगा तो क्या आएगा? इस बात को पार्टी का हर नेता समझता है। देखो सचिन पायलट जी सब्र से बैठे हैं। राहुल गांधी को यह बात कहे हुए तीन महीने से ज्यादा का समय हो गया है और पायलट भी लगातार सब्र रखे हुए हैं। अब एक बार फिर उनके सीएम बनने की बारी आई तो गहलोत गुट उनके विरोध में खड़ा हो गया है।
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