कांग्रेस का एक धड़ा अभी भी निराश नहीं है। उसे लग रहा है कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सक्रिय होने के बाद सूरत बदल सकती है। यह कांग्रेस पार्टी के उन नेताओं का धड़ा है जिन्हें अशोक गहलोत के इशारे पर राजस्थान, एटीएस, राजस्थान एसओजी द्वारा सचिन पायलट समेत कई नेताओं को भेजी गई नोटिस हजम नहीं हो रही है।
बताते हैं अशोक गहलोत की बैठकों से दूर विधायकों में अधिकांश मुख्यमंत्री के कामकाज के तरीके से सख्त नाराज हैं। वह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपनी शिकायत दर्ज कराने आए हैं, लेकिन इनमें से तमाम विधायक पार्टी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए एक थ्योरी अभी भी चल रही है कि अशोक गहलोत की स्थिति साफ होने के बाद कांग्रेस आला कमान राजस्थान में सरकार बचाने के लिए आखिरी दांव चल सकता है।
भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया राजस्थान सरकार के भविष्य को लेकर स्क्रिप्ट राइटर की भूमिका में हैं। वह सचिन पायलट के दोस्त भी हैं। उन्होंने कल एक बयान देकर खलबली पैदा कर दी है। इसे सचिन पायलट के कांग्रेस छोड़कर बागी होने और भाजपा में शामिल होने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
सत्ता के गलियारे में कानाफूसी चल रही है कि भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार सचिन पायलट को राजस्थान में मुख्यमंत्री का पद ऑफर कर चुके हैं। लेकिन अभी ऐसा कोई भी निष्कर्ष एक जल्दबाजी होगी। राजस्थान में भाजपा के 76 विधायक हैं। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि 10 विधायक बफर जोन वाले हैं। सरकार बनाने का विश्वास देने वाले संख्या बल की स्थिति आने पर भाजपा इनका समर्थन ले लेगी।
200 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए उसे कुल 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। इसको लेकर पार्टी के नेता अंदरखाने में हर कोशिश कर रहे हैं। ऊपरी तौर पर चाहे भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा हों या ओम माथुर, भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सब खामोशी से कांग्रेसी नेताओं की रार का खेल देख रहे हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया भी खामोशी से इसे कांग्रेस का भीतरी कलह बताकर हर घटनाक्रम पर बारीक निगाह रख रहे हैं।
राजस्थान में भाजपा के 76 विधायक हैं। इनमें 45 विधायक पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समर्थक हैं। वह राज्य भाजपा की अभी भी कद्दावर नेता बनी हुई हैं। मध्यप्रदेश में सरकार गिरने से ऐन पहले राज्य भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सक्रियता काफी बढ़ गई थी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के बेटे के रिशेप्सन में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से चौहान की चर्चा के बाद से घटनाक्रम तेजी से चला था। अभी यहां इस तरह की कोई हलचल नहीं है। बताते हैं राजस्थान में भाजपा की सरकार बनने की संभावना बिना वसुंधरा राजे की सहमति के मुश्किल होगी। अभी वसुंधरा राजे राज्य में चल रहे सत्ता के घमासान में किसी तरह की कोई इंट्री नहीं ले रही हैं।