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Rajasthan News: ठंड के मौसम में इम्यूनिटी बढ़ाती है तिल-गुड़ की गजक, दौसा से रोजाना 500 किलो तक होती है सप्लाई

Sun, 07 Jan 2024 04:23 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

Dausa: जैसे-जैसे सर्दी अपने परवान पर आती जा रही है, तिल की गजक की डिमांड भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में यदि गजक दौसा की हो तो बात ही कुछ और है। सर्दी के मौसम में लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। रहन-सहन में बदलाव के साथ ही खाने-पीने की आदतों में भी इस मौसम में बदलाव आया है। 
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दौसा की प्रसिद्ध गजक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूरा प्रदेश भयंकर ठंड की चपेट में है। इस मौसम में लोग अपने तरीके से इम्यूनिटी मेंटेन रखने के लिए या तो घर में कुछ गरमा-गरम बनाकर रहे हैं या फिर तिल की गजक के साथ ठंड के साथ दो-दो हाथ करते नजर आ रहे हैं। कड़ाके की इस ठंड के मौसम में बाजरा, गुड़ और तिल जैसी चीजें आम आदमी के खानपान का हिस्सा होता है। 

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ऐसे में दौसा की प्रसिद्ध गजक की डिमांड बढ़ गई है। दौसा में रामावतार साहू द्वारा बनाई गई गजक देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक डिमांड करके मंगवाई जाती है। साहू बताते हैं कि सर्दी के मौसम में गजक खाने से इम्युनिटी तो बढ़ती ही है साथ ही तिल और गुड़ खाने से शरीर को गर्माहट मिलती है। इसलिए इस मौसम में गजक की डिमांड ज्यादा रहती है।

यहां गजक बनाने वाले कारीगर तिल की बेहतर सिंकाई और जोरदार कुटाई करके लच्छेदार गजक बनाते हैं। गजक स्वादिष्ट और खस्ता होने के कारण दौसा सहित कई शहरों में भी इसकी डिमांड रहती है। यहां कि गजक विदेशों तक अपने प्राकृतिक स्वाद के लिए जानी जाती है। यहां गजक की कई वैरायटी उपलब्ध है, जिनमें लच्छा गजक, गुड़ व चीनी की गजक, मूंगफली लच्छा और मूंगफली पट्टी, तिलपट्टी के अलावा कई और तरह की गजक बनाई जाती है।
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गजक व्यापारी रामअवतार साहू बताते हैं कि आज भी उनके यहां हाथों से बनी हुई गजक ही बनवाई जाती है। यही कारण है कि उनकी गजक देशभर में धूम मचा रही है। रोजाना उनके यहां लगभग 500 किलो गजक बनाई जाती है, जिसकी लगातार डिमांड बनी रहती है।

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