झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में स्कूल की छत गिरने से सात बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने सभी जर्जर स्कूलों की जांच के आदेश दिए हैं। तीन दिन पहले छाबड़ा के तुमड़ा गांव में भी स्कूल भवन गिरा था, जिसकी मरम्मत की मांग विधायक पहले ही कर चुके थे, लेकिन शिक्षा मंत्री की अनदेखी से हादसा हो गया।
राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में सरकारी स्कूल में हुए हादसे में सात बच्चों की मौत के बाद सभी जर्जर स्कूलों की देखरेख के आदेश जारी हुए हैं। अगर यही कार्रवाई पहले की गई होती तो शायद इतनी बड़ी घटना न घटती। ऐसा ही एक हादसा तीन दिन पहले छाबड़ा में हुआ। यहां भी एक सरकारी स्कूल का भवन बारिश में गिर गया। हैरानी की बात ये है कि भवन के गिरने से पहले विधायक इसकी मरम्मत के लिए आवाज उठा चुके थे, लेकिन शिक्षामंत्री की ओर से कोई सुनवाई नहीं हुई। नतीजा ये भवन गिर गया। गनीमत रही कि इसमें किसी जान नहीं गई।
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जानकारी के अनुसार छाबड़ा में तीन दिन पहले सरकारी स्कूल का भवन गिरा था। स्थानीय विधायक प्रताप सिंह सिंघवी का कहना है कि स्कूलों की जर्जर हालत को लेकर मैंने शिक्षा मंत्री को कई बार पत्र भी लिखा, लेकिन उनकी तरफ़ से कभी कोई जवाब नहीं आया।
आज मनोहरथाना स्कूल दुखान्तिका पर विधायक प्रताप सिंह सिंघवी बोले, तीन दिन पहले भी मेरी विधानसभा क्षेत्र में तुमड़ा के सरकारी स्कूल में हादसा हो चुका है। उन्होंने कहा कि रमसा और समसा में कितना किस मद में हो रहा खर्च इसकी कोई जानकारी नहीं मिल रही है। वित्त विभाग के व अन्य अधिकारी फाइल पर चर्चा करने को लिखकर कर्तव्य की इति श्री कर लेते हैं। अधिकारियों की यह मनोवृत्ति ठीक नहीं।
हनुमान बेनीवाल ने संसद में उठाया झालावाड़ हादसे का मुद्दा
झालावाड़ हादसे का मुद्दा आज देश की राजधानी में भी गूंजा। झालावाड़ में हादसे के बाद नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने संसद में कहा कि सभी अफसरों और नेताओं के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाया जाए, ताकि स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार हो सके।