नहरी पानी के अभाव और अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में भीषण गर्मी के कारण अनूपगढ़ शाखा क्षेत्र में सरसों की अंकुरित फसल सूखने लगी है। सिंचाई के पानी की मांग को लेकर खेत बचाओ किसान बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन शुक्रवार को 44वें दिन भी जारी रहा। खेतों में नमी तेजी से घटने और मिट्टी कठोर होने से अंकुरित पौधों को बचाना मुश्किल हो रहा है। समय पर सिंचाई का पानी नहीं मिलने के कारण किसान अब 29 अक्तूबर को प्रस्तावित अगली बारी का इंतजार कर रहे हैं।
सिंचाई के पानी का लंबा इंतजार
किसानों ने सरसों की बिजाई से पहले खेतों में एक बार सिंचाई की थी। इसके बाद लंबे समय तक पानी नहीं मिलने से खेतों की नमी तेजी से कम हो गई। किसानों के अनुसार, समय पर बिजाई और अंकुरित फसल को बचाने के लिए अक्तूबर में दो बार सिंचाई का पानी मिलना चाहिए था। किसानों को 29 सितंबर को पानी की बारी मिली थी। इसके बाद खेतों में नमी बनाए रखने के लिए 18 अक्तूबर को दूसरी बारी देने की मांग की गई थी, लेकिन उन्हें पानी नहीं मिला।
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दोबारा बिजाई करने की नौबत
किसानों का कहना है कि यदि 29 अक्तूबर को सिंचाई का पानी मिल भी जाता है, तो खेत तैयार करने और दोबारा बिजाई करने में काफी समय लगेगा। ऐसे में बिजाई का काम 7 से 8 नवंबर तक खिंच सकता है। इससे सरसों की फसल की बढ़वार और कुल उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। मूंग की फसल में पहले ही भारी नुकसान झेल चुके किसानों के सामने अब सरसों की फसल बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
विभागीय अनदेखी से किसानों में रोष
सिंचाई के पानी की समस्या को लेकर किसान पहले ही विभागीय अधिकारियों और राज्य सरकार तक अपनी मांग पहुंचा चुके हैं। इसके बावजूद समय पर पानी उपलब्ध नहीं होने से खेतों में अंकुरित फसल के सूखने और नष्ट होने का संकट गहरा गया है। किसानों को आशंका है कि जल्द सिंचाई का पानी नहीं मिला तो कई खेतों में दोबारा बिजाई करनी पड़ेगी। इससे उनकी लागत बढ़ने के साथ आर्थिक नुकसान भी बढ़ सकता है। सिंचाई के पानी की मांग को लेकर किसान पिछले 44 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।