मजबूरी कहे या बदलते समय की बदनसीबी। पहले शरण दी गई फिर छह बच्चों के साथ जमकर मारपीट की गई। बुधवार को स्कूल जाने के बजाय रोते बिलखते बच्चे जिला पुलिस अधीक्षक ऑफिस आ पहुंचे। जिला पुलिस अधीक्षक के पास मामला पहुंचते ही कोतवाली थाने में मामला दर्ज हो गया। ये पूरा मामला नागौर शहर के शारदापुरम स्थित गो ग्रीन वेल चिल्ड्रन समिति की ओर से संचालित चोखा घर का है। यहां बच्चों के साथ एक कारिंदे ने बर्बरता पूर्वक उनके साथ मारपीट की है। सभी बच्चों की उम्र करीब 9 से 12 साल के बीच भी बताई जा रही है।
पीड़ित बच्चों ने बताया कि वह ग्रीन वेल चिल्ड्रन समिति के शारदा पुरम कॉलोनी स्थित चोखा घर में रहते हैं। इस हॉस्टल में मंगलवार की रात यहां के कार्मिक विजेंद्र ने उन्हें शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी। जब एक साथ आधा दर्जन बच्चे कंट्रोल रूम पहुंचे तो पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। बच्चों से पूरा वाक्य सुनकर उनके शरीर पर लगी चोटें देखी किसी के हाथ पर तो किसी के गले पर गहरी चोट के निशान थे। बच्चे रो-रोकर अपनी पीड़ा सुन रहे थे।
बच्चों की मजबूरी जो सुने वो रो उठेंगे
बच्चों की मजबूरी भी ऐसी की हर कोई यदि उनकी बात सुने तो वह भी रो उठेगा। किसी के ऊपर से बाप का साया उठ गया तो किसी की मां ने दूसरी शादी कर ली। दादा और दादी लालन पोषण करने में असमर्थ हैं। किसी के पिता नहीं तो गरीब मां पढ़ने के लिए यहां लेकर आई यह सोचकर की रहने खाने के साथ बच्चों की पढ़ाई भी हो जाएगी।
बाल कल्याण समिति ने लिया एक्शन
पूरे मामले के बाद नागौर की बाल कल्याण समिति टीम ने एक्शन लिया और कूक के अध्यक्ष मनोज सोनी टीम के साथ वहां पहुंचे। वहां की व्यवस्थाएं देखी और मौजूद बच्चों से असलियत जानी। उसके बाद 15 बच्चों को राजकीय किशोर गृह में शिफ्ट करने के आदेश दिए गए हैं।
मुख्य आरोपी गिरफ्तार
मामले को लेकर जिला पुलिस अधीक्षक नारायण टोगस ने बताया कि नाबालिग बच्चों के साथ बुरी तरीके से मारपीट करने वाले हॉस्टल के कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बच्चों को प्रताड़ित करने और कौन-कौन शामिल है, इसके लिए मामले की जांच जारी है। फिलहाल आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है।