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मोदी के प्यारे इमरान ने टीचिंग के लिए ठुकरा दी अधिकारी की नौकरी

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जयपुर निवासी इमरान खान को तो आप शायद अभी नहीं भूले होंगे, वहीं इमरान जिनका नाम प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में ब्रिटेन यात्रा के दौरान वैंम्बले स्टेडियम में अपने संबोधन के दौरान लिया था।
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अलवर के एक प्राइमरी स्कूल के इस शिक्षक की मोदी ने इसलिए तारीफ की थी क्योंकि उन्होंने शिक्षण कार्य से समय निकालकर छात्र-छात्राओं के लिए 50 से ज्यादा ऐसे एप्स का निर्माण किया था जो उनकी पढ़ाई में मददगार साबित हो सकते हैं।

इमरान के इसी हुनर की प्रधानमंत्री मोदी ने दिल खोलकर सराहना की थी। मोदी ने अन्य शिक्षकों को भी इमरान से प्रेरणा लेने की सीख दी थी, वही इमरान खान एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार की वजह भी ऐसी है जिसे जानकर आप एक बार फिर इमरान की तारीफ किए बिना नहीं रह सकेंगे।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार अलवर के प्राइमरी स्कूल में शिक्षक इमरान की योग्यता को देखते हुए वसुंधरा सरकार ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी के साथ एक नई नौकरी देने का प्रस्ताव दिया था।

कहा वर्तमान नौकरी में संतुष्ट, अधिकारी बनकर नहीं कर पाऊंगा कुछ

इस प्रस्ताव को लेकर खुद वसुंधरा के दो मंत्री और एक आईएस इमरान के पास पहुंचे थे, लेकिन इमरान ने पूरी विनम्रता के साथ वसुंधरा के प्रस्ताव को इंकार करते हुए टीचिंग में ही लगे रहने की बात कही।

ग्रेड 3 के शिक्षक इमरान की काबिलियत का फायदा लेकर शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए वसुंधरा सरकार ने इमरान को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में प्रोजक्ट ऑफिसर के पद पर आकर्षक नौकरी का प्रस्ताव दिया था।

वसुंधरा सरकार में शिक्षा मंत्री कालीचरण सर्राफ उनके सहयोगी वासुदेव देवनानी ने इमरान को यह प्रस्ताव दिया था। इमरान ने बताया कि मंत्री उनसे यह जानना चाहते थे उनके द्वारा बनाई गई ये ऐप छात्र-छात्राओं के लिए विज्ञान, गणित और अंग्रेजी सीखने में कैसे मददगार साबित हो सकते हैं।

वे सूचना प्रोद्यौगिकी के प्रति इमरान की समझ को छात्र छात्राओं के लिए एक मंच के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते थे। बता दें कि राजस्‍थान बच्चों की शिक्षा के मामले में अंतिम पांच स्‍थानों पर है जिसमें उनके पढ़ने, समझने और गणित के आधार पर आंकलन किया जाता है।
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इमरान की प्रतिभा का लाभ उठाना चाहती थी सरकार

इसी चीज को महसूस करते हुए इमरान ने बच्चों के लिए ऐसे ऐप विकसित करने की जरूरत महसूस की जिनसे सरकारी स्कूलों के छात्र भी प्राइवेट स्कूलों के छात्रों का मुकाबला कर सकें।

इमरान बताते हैं कि उन्होंने सरकार के प्रस्ताव को धन्यवाद के साथ इंकार कर दिया। जब अधिकारियों ने उनसे इसका कारण पूछा तो उनका जवाब था कि मैं अपने देश की सेवा करना चाहता हूं और मैं अपनी पूरी क्षमताओं के साथ इसमें योगदान दे रहा हूं।

ऐसे में एक अधिकारी के तौर पर शायद ही मैं इस तरह कार्य कर पाऊं जैसे अब कर रहा हूं। खान ने इसके लिए इंकार करते समय इसकी भी परवाह नहीं की कि उन्हें जिस नौकरी का प्रस्ताव दिया जा रहा है वह उनकी वर्तमान नौकरी से काफी ऊंची है।
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