गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करवाने का सुझाव देने वाले राजस्थान हाई कोर्ट के जज महेश चंद्रा शर्मा ने अपने इस सुझाव के पीछे तर्क दिया है।
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान शर्मा ने कहा- 'जो मोर है, ये आजीवन ब्रह्मचारी है। वह कभी भी मोरनी के साथ सेक्स नहीं करता। इसके जो आंसू आते हैं, मोरनी उसे चुगकर गर्भवती होती है। मोर या मोरनी को जन्म देती है।'
उन्होंने कहा 'गाय के अंदर कई सारे गुण हैं जिनको देखते हुए राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।'
एक और उदाहरण देते हुआ शर्मा ने कहा कि 'नेपाल एक हिंदू राष्ट्र है जिसने गाय को अपना राष्ट्रीय पशु घोषित किया है। उम्मीद है हमारे देश में भी गाय को यह कानूनी मान्यता मिलेगी।'
बता दें कि हिंगौनिया गौशाला मसले पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस शर्मा ने यह सुझाव सरकार को दिए। राजस्थान हाईकोर्ट ने बहुचर्चित हिंगौनिया गौशाला मामले में बुधवार को 7 साल बाद अपना फैसला सुनाया।
फैसले में कहा गया है कि केंद्र से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करवाने के लिए केंद्र सरकार के सामने पक्ष रखने के लिए मुख्य सचिव और महाधिवक्ता कार्यवाही करे। हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर कमेटी भी बनाने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसले में कहा है कि हिंगौनिया गौशाला में भ्रष्टाचार की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो से करवाई जाए। कोर्ट ने एडीजे को हर तीन महीने में गोशाला को लेकर रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यूडीएच सचिव और निगम आयुक्त सहित सम्बंधित अफसरों को महीने में एक बार गौशाला का दौरा करने के निर्देश दिए।