राजस्थान की पिछली कांग्रेस सरकार की ओर से शुरू की गई नि:शुल्क दवा योजना का आर्थिक बोझ भाजपा सरकार से नहीं सहा जा रहा है। अब इस योजना को चलाने के लिए राज्य सरकार दानदाताओं की ओर ताक रही है।
हालांकि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने स्पष्ट किया है कि गहलोत सरकार की कोई भी योजना बंद नहीं की जाएगी, लेकिन समीक्षा जरूर होगी। अधिक से अधिक लोगों को फायदा पहुंचान के लिए संचालन का तरीका बदल सकता है।
सूत्रों के अनुसार इस योजना का भविष्य २४ फरवरी को चिकित्सा मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की अध्यक्षता में होनेवाली राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन की बैठक में तय होगा।
सूत्रों ने बताया कि राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन की बैठक के एजेंडे में इस योजना को जन सहयोग से चलाने का बिंदु रखा गया है।
राठौड़ बैठक में शामिल होने वाले सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, अधीक्षक और प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों से इस योजना के आर्थिक बोझ को कम करने पर उनके विचार पूछ सकते हैं।
कॉर्पोरेशन के अफसरों के अनुसार आने वाले समय में इस योजना जन सहयोग या फिर कुछ शर्तो के साथ निजी हाथों में दिया जा सकता है। इससे सरकारी खजाने में बचत हो सकती है।
बैठक में योजना की बेहतरी व दवाओं की सप्लाई और गुणवत्ता पर भी चर्चा होगी। फिलहाल अधिकांश दवाइयों की खरीद नहीं हो पा रही है।