राजस्थान सरकार ने रविवार को सरकारी नौकरियों के लिए प्रतियोगी परीक्षा सहित विभिन्न परीक्षा प्रक्रियाओं में खामियों की जांच करने और उन्हें सुधारने के लिए एक रोडमैप निर्धारित करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। गहलोत सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
न्यायमूर्ति व्यास की अध्यक्षता वाले पैनल में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और आरपीएससी के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र कुमावत भी सदस्य होंगे, जबकि कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव इसके सदस्य-सचिव होंगे। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि यह समिति परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों की जांच करेगी और 45 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश विजय कुमार व्यास की अध्यक्षता वाली समिति का गठन अशोक गहलोत सरकार ने अजमेर स्थित राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डीपी जारोली को बर्खास्त करने और बोर्ड के सचिव अरविंद कुमार सेंगवा समेत दो अन्य के निलंबन के एक दिन बाद किया। सितंबर में शिक्षक भर्ती परीक्षा (आरईईटी) के दौरान प्रश्न पत्र लीक में उनकी कथित संलिप्तता के बाद दंडात्मक उपाय किए गए थे।
समिति विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्न बैंक के निर्माण, प्रश्नपत्र तैयार करने, प्रिटिंग की प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा एवं गोपनीयता का उच्चतम स्तर सुनिश्चित करने के संबंध में सुझाव देगी।
इसके साथ ही समिति परीक्षा केंद्र स्थापित करने के लिए आधारभूत संरचना, परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्र की सुरक्षा एवं गोपनीयता के मापदंड तथा उपाय के संबंध में भी सुझाव देगी। साथ में किसी भी तरह की कोताही की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्यवाही के संबंध में भी सुझाव देगी।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार देर रात उच्च स्तरीय बैठक में प्रतियोगी परीक्षाओं में पूरी गोपनीयता, नकल, पेपर लीक आदि घटनाओं को रोकने के संबंध में सुझाव देने के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने के संबंध में निर्देश दिए थे।