राजस्थान में सरकार बदलते ही यूपीए अध्यक्षा सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की जमीनों की तलाश शुरू हो गई है। राजस्थान के राजस्व मंडल, अजमेर ने सभी जिला कलक्टरों से वाड्रा से संबंधित जमीनों को लेकर शीघ्र जवाब मांगा है।
कांग्रेस की पिछली गहलोत सरकार में सौर ऊर्जा पार्क तथा रिफाइनरी के आस-पास सांठ-गांठ कर परियोजना के आने से पहले वाड्रा पर किसानों से कौड़ियों के दाम जमीन खरीदने के आरोप हैं।
साथ ही, जब परियोजना की घोषणा हुई और लागू होने की स्थिति बनी, तो ये जमीनें विभिन्न कंपनियों को सोने के भाव में बेची गईं।
अधिकारियों से मांगी जानकारी
राजस्थान में भाजपा की सरकार बनते ही भाजपा के सांसदों और विधायकों ने वाड्रा पर किसानों से ठगी का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की फिर से मांग की गई।
मुद्दा जोर पकड़ते ही राजस्व मंडल ने सभी जिला कलक्टर को खत लिखकर इस संबंध में शीघ्र जवाब मांगा है।
अब राजस्व मंडल ने सभी जिला कलक्टर से पूछा है कि आपके अधीन क्षेत्र में वाड्रा की कहां और कितनी जमीन है। उसे किस मूल्य पर खरीदा गया है। सभी जिलों से सूचना आने के बाद राजस्व मंडल इसकी विस्तृत रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजेगा।
वाड्रा ने 10 हजार बीघा जमीन सस्ते दामों में खरीदीं
भाजपा का आरोप है कि वाड्रा ने चार कंपनियों स्काई लाइट रियलिटी प्राईवेट लिमिटेड, स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड, नार्थ इंडिया आईटी पार्क प्राइवेट लिमिटेड व रीयल अर्थ एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड और कुछ डीलरों के माध्यम से वर्ष 2008-09 से 2011-12 के बीच राजस्थान के बीकानेर, जैसलमेर आदि जिलों के किसानों से 10 हजार बीघा से ज्यादा जमीन सस्ते दामों में खरीदी।
इस खरीद के बाद केन्द्र और राजस्थान सरकार ने बीकानेर और जैसलमेर को सोलर पार्क जोन घोषित कर दिया था। इसके बाद वाड्रा ने सोलर प्लांट लगाने वाली कंपनियों को कई गुना ज्यादा दामों में इन जमीनों को बेचा, जिससे संबंधित किसान किसान ठगा महसूस कर रहे हैं।
खेमका जांच की मंजूरी के बाद खींचे कदम
रॉबर्ट वाड्रा द्वारा जमीन अधिग्रहण के मामले पर खुलकर बोलने वाले हरियाणा के सीनियर आईएएस अशोक खेमका के खिलाफ सीबीआई जांच नहीं होगी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने गत 17 जनवरी को सीबीआई जांच कराने के
अपने फैसले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
खेमका के खिलाफ गोदामों की छत गैलवैल्यूम शीट से बदलने को दिए टेंडर में गड़बड़ी की आशंका पर सीबीआई जांच का फैसला लिया गया है।
लेकिन
इस फैसलों को राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष सिफारिश भेजने से पहले ही
स्थगित कर दिया है। लोकसभा चुनाव में यह मामला कोई मुद्दा न बन जाए इसलिए
सरकार बैकफुट पर आई है।
ऐसा माना जा रहा था कि राज्य सरकार अशोक खेमका से नाराज होकर ऐसी कार्रवाई कर रही है।