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Nagaur: कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार ने नहीं खर्चे 16 करोड़, इंजेक्शन न मिलने से बच्चे की मौत, जानें मामला

Sat, 29 Apr 2023 01:35 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर

सार

प्रदेश सरकार के लिए 16 करोड़ रुपये की अहमियत एक मासूम की जान से ज्यादा है। यही वजह है कि नागौर में एक दो साल के मासूम ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया, क्योंकि प्रदेश सरकार कोर्ट के आदेश के बाद भी उसके लिए 16 करोड़ रुपये का इंतजाम नहीं कर सकी।
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इलाज के अभाव में बच्चे की मौत - फोटो : social media
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विस्तार
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जानकारी के अनुसार नागौर में एक दो साल का मासूम दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था। उसके इलाज के लिए 16 करोड़ रुपये के इंजेक्शन की जरूरत थी। पिता की आर्थिक स्थिति ठीक न हो पाने की वजह से वो उसका इला करा पाने में सक्षम नहीं था। बताया जा रहा है कि बच्चे के पिता ने इलाज के लिए सरकार से लेकर कोर्ट तक मदद की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने बच्चे के इलाज को लेकर आदेश भी जारी किया था, बावजूद उसका इलाज नहीं हो सका। कोर्ट ने राजस्थान सरकार को इलाज के संबंध में आदेश भी जारी किया था। इस दुर्लभ बीमारी के लिए 16 करोड़ तक का टैक्स भी माफ कर दिया गया था। बावजूद इसके इंजेक्शन का इंतजाम नहीं हो सका और बच्चे का इलाज नहीं हो पाया और उसकी मौत हो गई। 

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बच्चे के पिता ने सरकार से मांगी थी मदद
बच्चे के पिता शैतान सिंह की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह खुद इतने रुपयों का इंतजाम कर पाए। अपने बच्चे की जान बचाने के लिए उसने सरकार से कई बार गुहार लगाई। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मदद के लिए पत्र भी लिखा था। 

दुर्लभ बीमारी में हो जाती है पानी की कमी
इस दुर्लभ बीमारी में शरीर में पानी की कमी हो जाती है। बच्चा स्तनपान नहीं कर पाता और धीरे-धीरे अंग काम करना बंद कर देते हैं। मासूम बच्चा नौ महीने से जयपुर में भर्ती था। उसके शरीर में प्रोटीन नहीं बन रहा था। वह कुछ खा नहीं पा रहा था। इस बीमारी के इलाज में जोलोन्स्म्मा इंजेक्शन की जरूरत होती है। इस इंजेक्शन की कीमत करीब 16 करोड़ रुपये है।
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कोर्ट के निर्देश के बाद भी नहीं मिली मदद
बच्चे के इलाज के लिए जिस इंजेक्शन की जरूरत थी उसके लिए 16 करोड़ का खर्च था। इसके लिए परिजनों ने राज्य और केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई। इसके बाद पिता ने कोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने राज्य सरकार को बच्चे का इलाज करवाने के लिए निर्देश दिए, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया और मासूम की मौत हो गई।

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