राजस्थान में डॉ. सविता बेन अम्बेडकर योजना के तहत अन्तर्जातीय विवाह पर प्रोत्साहन राशि अब 10 लाख रुपए मिलेगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राशि बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है।
अभी तक यह राशि 5 लाख रुपए मिलती रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित ‘डॉ. सविता बेन अम्बेडकर अन्तर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना’ के अन्तर्गत अन्तर्जातीय विवाह के बाद 10 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
इस राशि में से 5 लाख रुपए 8 साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) कराए जाएंगे। बाकी 5 लाख रुपए विवाह करने वाले नव विवाहित दंपत्ति के जॉइंट बैंक अकाउंट में जमा कराए जाएंगे। सीएम गहलोत ने साल 2023-24 के बजट में इस संबंध में घोषणा की गई थी।
80 फीसदी से अधिक दिव्यांगता वाले से शादी करने पर मिलेंगे 5 लाख
प्रदेश में विशेष योग्यजन से विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए ' सुखद दाम्पत्य जीवन योजना' के तहत अब 5 लाख रुपए की सहायता राशि मिलेगी। मुख्यमंत्री गहलोत ने राशि में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसमें 80 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता वाले विशेष योग्यजन को जीवनसाथी बनाने पर आर्थिक सहायता को 50 हजार से बढ़ाकर 5 लाख रुपए किया गया है।
गहलोत के इस निर्णय से विशेष योग्यजनों को सम्मान मिलेगा। गहलोत ने बजट वर्ष 2023-24 में सुखद दाम्पत्य जीवन योजना के अन्तर्गत विशेष योग्यजनों को विवाह के बाद दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि में वृद्धि करने की घोषणा की गई थी। इसके इम्प्लीमेंटेशन के लिए यह स्वीकृति दी गई है। इस योजना में वित्तीय वर्ष 2022-23 में जनवरी, 2023 तक 208 विशेष योग्यजनों को योजना का फायदा दिया जा चुका है।
क्यों उठाया गया यह कदम?
समाज में जाति-पांति, ऊंच-नीच का भेदभाव खत्म करने और दिव्यांग-विशेष योग्यजनों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने और मौलिक अधिकार उपलब्ध कराने के लिए सरकारें लगातार कोशिश कर रही हैं। प्रदेश की गहलोत सरकार ने भी इसी को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। आज भी लोग इंटरकास्ट मैरिज करने में कतराते हैं।
ऑनर किलिंग जैसी घटनाएं कई बार सवाल खड़े करती रही हैं। बदलते युग और दौर के साथ लड़का-लड़की कई बार एक दूसरे से प्रेम विवाह भी करते हैं। जिसमें जाति-पांति का बंधन नहीं रह जाता है। लेकिन परिजनों के डर से लड़का-लड़की कई बार गलत कदम भी उठा लेते हैं या परिवार के लोग शादी के बाद भी ऐसे जोड़ों को स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए समाज की सोच बदलने और नवविवाहित जोड़े को आर्थिक सहायता देकर सम्मान के साथ जीने की स्थितियां देने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।