इसे कहते हैं समय का फेर...जानिए कैसे
राजपूत समाज के समाजिक कार्यकर्ता विक्रम सिंह का मानना है कि भाजपा ने गत लोकसभा चुनाव में जसवंत सिंह का न केवल टिकट काटा, बल्कि उनके स्थान पर कांग्रेस में लबे समय तक सांसद रहे कर्नल सोना राम को प्रत्याशी बना दिया था। अब उसी तरह से वसुंधरा के सामने कांग्रेस ने पूर्व भाजपाई को मैदान जीतने के लिए भेजा है। कांग्रेस पार्टी ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह को टिकट दिया है। इससे कांग्रेस पार्टी ने दो निशाने लगाए हैं। एक, राजस्थान के राजपूतों को यह संदेश दे दिया है कि भाजपा में उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।
दूसरा, भाजपा ने अपने एक कद्दावर नेता के साथ किस तरह बेरुखी दिखाई है, यह भी बता दिया है। पहले जसवंत सिंह का टिकट काटा जाता है और फिर जब वे बीमार होते हैं तो भाजपा के अधिकांश बड़े नेता उनसे कन्नी काट लेते हैं। दिल्ली के अस्पताल में भर्ती जसवंत सिंह का हालचाल जानने के लिए लाल कृष्ण आडवाणी के अलावा अन्य कोई नेता नहीं पहुँचा था। कांग्रेस पार्टी ने इन सब वजहों को एक साथ जोड़कर यह साबित करने की कोशिश की है कि राजस्थान में पारम्परिक राजपूत मतदाता भाजपा से नाराज हैं।
चुनाव में ये सब बातें भी मुकाबले को कांटे का बनाएंगी...
सीमावर्ती क्षेत्र के कई जिलों में सिंधी मुसलमान भी बड़ी संख्या में रहते हैं। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे अमीन खान ने कुछ समय पहले अपने एक बयान में कहा था कि हमारे इलाक़े में राजपूतों और मुसलमानों में अच्छे रिश्ते रहे हैं।इससे कांग्रेस को लाभ होगा। उनके मुताबिक, मरुस्थल के इस भूभाग में अक्सर पूर्व जागीरदार और राजपूत भाजपा की बड़ी ताकत रहे हैं।अब मानवेन्द्र के कांग्रेस में जाने से भाजपा कमजोर हो सकती है। मुस्लिम और राजपूत, कांग्रेस के पक्ष में खड़े होंगे, इसके पूरे आसार हैं। मानवेंद्र सिंह ने जब कांग्रेस का दामन थामा तो उससे कुछ दिन पहले खासतौर से राजपूत समुदाय में यह मैसेज भी चलाया गया कि वाजपेयी सरकार के दौरान जब विमान अपहरण के बाद किसी मंत्री को कंधार भेजने का मौका आया तो जसवंत सिंह को रवाना कर दिया गया। उस वक्त जसवंत सिंह ने पार्टी के लिए सारी तोहमत अपने नाम पर ले ली थी, मगर उसी भाजपा ने 2014 में उनकी टिकट काट दी।