केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के गृह जिले बीकानेर में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बीकानेर लोकसभा की आठ में से चार सीटों पर सफलता हासिल की थी, लेकिन जब लोकसभा के चुनाव हुए, अर्जुन राम मेघवाल ने लगभग 60 फीसदी वोटों के साथ बड़ी जीत हासिल की थी। बीकानेर में उन्हें भाजपा की तरफ़ से राजस्थान के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर भी देखा जा रहा है, लिहाजा उनके गृह जिले में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन का दबाव भी मंत्री के कंधे पर ही है। लेकिन बीकानेर के लोग बता रहे हैं कि इस बार भी बीकानेर जिले में भाजपा और कांग्रेस में जबरदस्त टक्कर है। मामूली अंतर से यह दांव किसी भी पलड़े की ओर झुक सकता है। किसान, महंगाई और सत्ता में बदलाव यहां सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
पूरे बीकानेर जिले में विकास का अच्छा काम हुआ है। अशोक गहलोत सरकार में मंत्री बीडी कल्ला ने अपने क्षेत्र बीकानेर पश्चिम में बेहतर काम किया है। उनकी स्थानीय लोगों पर अच्छी पकड़ बताई जाती है। शहर में मुस्लिम समुदाय के लोगों की अच्छी संख्या उनके पक्ष में है। इसका उन्हें लाभ मिल रहा है। लेकिन यहां पर सुरक्षा बड़ा मुद्दा बना हुआ है। स्थानीय निवासी हनुमान पुरी की शिकायत है कि पुलिस की ढिलाई अपराधियों को बेखौफ किये हुए है। शाम के बाद सड़कों पर निकलना मुश्किल हो जाता है। इसलिए लोग बदलाव चाहते हैं। मंत्री के काम से किसी को शिकायत नहीं है, लेकिन सुरक्षा का मुद्दा उनके काम पर भारी पड़ रहा है।
जितेंद्र साहू कहते हैं कि राजस्थान में आये दिन अपराध हो रहे हैं। अपराध की बड़ी-बड़ी घटनाएं घट रही हैं। लेकिन सरकार अपराधियों पर लगाम लगाने में असफल साबित हो रही है। उन्हें यहां योगी आदित्यनाथ जैसा मुख्यमंत्री चाहिए, जो अपराधियों पर कठोर कार्रवाई कर सके, लोगों को सुरक्षा प्रदान कर सके। सब्जी विक्रेता सुभाष विश्नोई कहते हैं कि अशोक गहलोत सरकार के काम से उन्हें कोई शिकायत नहीं है, स्थानीय लोग भी विधायक के कामकाज से संतुष्ट हैं। लेकिन इस बार उन्हें बदलाव चाहिए और इसलिए वे भाजपा को वोट करेंगे।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के गृह जिले बीकानेर में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बीकानेर लोकसभा की आठ में से चार सीटों पर सफलता हासिल की थी, लेकिन जब लोकसभा के चुनाव हुए, अर्जुन राम मेघवाल ने लगभग 60 फीसदी वोटों के साथ बड़ी जीत हासिल की थी। बीकानेर में उन्हें भाजपा की तरफ़ से राजस्थान के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर भी देखा जा रहा है, लिहाजा उनके गृह जिले में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन का दबाव भी मंत्री के कंधे पर ही है। लेकिन बीकानेर के लोग बता रहे हैं कि इस बार भी बीकानेर जिले में भाजपा और कांग्रेस में जबरदस्त टक्कर है। मामूली अंतर से यह दांव किसी भी पलड़े की ओर झुक सकता है। किसान, महंगाई और सत्ता में बदलाव यहां सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
पूरे बीकानेर जिले में विकास का अच्छा काम हुआ है। अशोक गहलोत सरकार में मंत्री बीडी कल्ला ने अपने क्षेत्र बीकानेर पश्चिम में बेहतर काम किया है। उनकी स्थानीय लोगों पर अच्छी पकड़ बताई जाती है। शहर में मुस्लिम समुदाय के लोगों की अच्छी संख्या उनके पक्ष में है। इसका उन्हें लाभ मिल रहा है। लेकिन यहां पर सुरक्षा बड़ा मुद्दा बना हुआ है। स्थानीय निवासी हनुमान पुरी की शिकायत है कि पुलिस की ढिलाई अपराधियों को बेखौफ किये हुए है। शाम के बाद सड़कों पर निकलना मुश्किल हो जाता है। इसलिए लोग बदलाव चाहते हैं। मंत्री के काम से किसी को शिकायत नहीं है, लेकिन सुरक्षा का मुद्दा उनके काम पर भारी पड़ रहा है।
जितेंद्र साहू कहते हैं कि राजस्थान में आये दिन अपराध हो रहे हैं। अपराध की बड़ी-बड़ी घटनाएं घट रही हैं। लेकिन सरकार अपराधियों पर लगाम लगाने में असफल साबित हो रही है। उन्हें यहां योगी आदित्यनाथ जैसा मुख्यमंत्री चाहिए, जो अपराधियों पर कठोर कार्रवाई कर सके, लोगों को सुरक्षा प्रदान कर सके। सब्जी विक्रेता सुभाष विश्नोई कहते हैं कि अशोक गहलोत सरकार के काम से उन्हें कोई शिकायत नहीं है, स्थानीय लोग भी विधायक के कामकाज से संतुष्ट हैं। लेकिन इस बार उन्हें बदलाव चाहिए और इसलिए वे भाजपा को वोट करेंगे।
भाजपा ने इस बार जेठानंद व्यास को बीकानेर पश्चिम से अपना उम्मीदवार बनाया है। हिंदू संगठन की पृष्ठभूमि से आने वाले व्यास भाजपा संगठन के व्यक्ति हैं। कार्यकर्ताओं से उनके बहुत अच्छे संबंध हैं। उन्हें अपने इन संबंधों का लाभ चुनाव में मिल रहा है। वे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। उन्हें अपनी उस छवि का भी लाभ मिल रहा है। भाजपा इस सीट को पहले भी दो बार जीत चुकी है। लोगों में बदलाव की चर्चा है। ऐसे में भाजपा को लगता है कि इस बार इस सीट पर बाजी उसके हाथ लग सकती है।
बीकानेर पूर्व की सीट पर भाजपा की सिद्धि कुमारी जीत की हैट्रिक लगा चुकी हैं। 2008 में इस सीट के बनने से अब तक 2008, 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव में वे जीत हासिल कर चुकी हैं। कामकाज के मामले में उन्हें काफी सक्रिय माना जाता है। क्षेत्र के लोग उनकी उपलब्धता से संतुष्ट हैं। यह उनकी लगातार चौथी बार जीत का कारण बन सकता है।