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Rajasthan Political Crisis: कांग्रेस नेता बोले- बहुमत परीक्षण है गहलोत के लिए सबसे सही विकल्प

Sat, 25 Jul 2020 10:57 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
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समर्थक विधायकों के साथ अशोक गहलोत (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के पास अपना बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा में शक्ति परीक्षण करना सबसे बेहतर विकल्प है। सर्वोच्च न्यायालय ने जहां राजस्थान उच्च न्यायालय की सुनवाई पर रोक लगाने से मना कर दिया है। वहीं शुक्रवार को उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई में अदालत ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था। यानी स्पीकर सीपी जोशी सचिन पायलट सहित बागी विधायकों को अयोग्य नहीं ठहरा सकते हैं।

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इसी बीच घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले पार्टी के दो रणनीतिकारों का कहना है कि पार्टी का एक धड़ा उच्च न्यायालय की कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने के जोशी के फैसले को लेकर चौकन्ना है। उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि चूंकि अदालत ने स्पीकर के फैसले पर स्टे लगा दिया है ऐसे में गहलोत के पास विधानसभा में जल्दी से बहुमत साबित करना ही बेहतर विकल्प है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस के रणनीतिकारों का कहना है कि नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे और वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ज्यादा समय तक विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को नहीं टाल सकते यदि निर्वाचित सरकार चाहती है। हालांकि वे राज्यपाल को आदेश देने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने के बारे में सोच रहे हैं। इससे देरी हो जाएगी। जिसका फायदा विपक्ष और कांग्रेस के बागी विधायकों को मिलेगा। जो अन्य विधायकों को अपनी तरफ कर सकते हैं।
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वर्तमान में गहलोत के पास 200 सदस्यीय विधानसभा में 101 विधायकों का समर्थन है। वहीं पायलट के साथ कांग्रेस के 18 और तीन निर्दलीय विधायक हैं, यानी उनके पास कुल 22 विधायकों का समर्थन है। दूसरी तरफ भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के पास 75 सीटे हैं। कांग्रेस के एक विधायक भंवरलाल मेघवाल बीमार हैं, उन्हें पायलट का करीबी माना जाता है। यदि पायलट के विधायकों को भाजपा में जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 97 हो जाएगी। ऐसे में यदि गहलोत खेमे के तीन विधायक पायलट गुट में आते हैं तो सरकार के लिए मुश्किल हो सकती है और भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है।

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