सरकारी कर्मचारियों के लिए आरजीएचएस बंद
पिछली गहलोत सरकार की हेल्थ स्कीम आरजीएचएस और चिरंजीवी लगभग बंद हो गई है। इसकी वजह आने वाली सरकार नहीं, बल्कि वित्त विभाग के अफसर हैं जिन्होंने दोनों बड़ी योजनाओं का पैसा ही नहीं चुकाया। आरजीएचएस के 300 करोड़ और चिरंजीवी योजना के 150 करोड़ से ज्यादा के बिल ट्रेजरी में पेंडिंग पड़े हैं। वहीं, निशुल्क दवा योजना का 300 करोड़ का बिल बकाया है, जिसके चलते अस्पतालों में फ्री दवाएं भी नहीं मिल रही।
जबाव देने से बचते रहे जिम्मेदार, जो दावे किए वे भी झूठे निकले
भुगतान से जुड़े मामलों में वित्त बजट और कोष निदेशालय की सीधी भूमिका होती है। अमर उजाला ने बजट निदेशालय के निदेशक बृजेश किशोर शर्मा, संयुक्त सचिव पवन जैमन और निदेशक कोष भूपेश माथुर से संपर्क किया। इनमें बृजेश शर्मा के अलावा किसी ने भी सवालों का जवाब नहीं दिया। डायरेक्टर बजट, बृजेश किशोर शर्मा ने कहा- जिनका भी पेंडिंग है उन्हें क्यू में लगा रखा है। कुछ हजार करोड़ की पेंडेंसी तो चलती है। 30 से 35 दिन में भुगतान का नंबर आ रहा है। आप जैसा कह रहे हैं वैसा कुछ नहीं है। मामले को लेकर निदेशक कोष लेखा एवं पदेन संयुक्त सचिव भूपेश माथुर से संपर्क कर जब सरकार में पेंडिंग बिलों के संबंध में जानकारी चाही गई तो वे कोई जवाब नहीं दे पाए और बात करने से ही मना कर दिया।
दावों को धराशायी करती सच्चाई
- वित्त विभाग का दावा 35 दिन की पेंडेंसी, लेकिन हकीकत में 2 से 6 महीने तक के बिल बकाया
- क्रॉप इंश्योरेंस 700 करोड़ 2 महीने से नहीं हुआ। किसान वर्ग सीधा प्रभावित।
- सोशल सिक्योरिटी पेंशन भुगतान 2 महीने से नहीं हुआ। 1700 करोड़ रुपए का भुगतान बाकी। 90 लाख लोग इससे सीधे जुड़े हैं।
- ई पंचायत 650 करोड़ रुपए का भुगतान 6 महीनों से नहीं किया गया। ग्रामीण प्रभावित।
- पेंशनर क्लेम सितंबर से बकाया।
- वेतन के एरियर सितंबर से बकाया।
नहीं हो पा रहे हैं काम
सरपंच संघ के अध्यक्ष बंशीधर गड़वाल ने कहा कि पंचायतों को केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग की तरफ से जो ग्रांट मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिली है। हर पंचायत को इस सहायता से 10 से 15 लाख रुपए आवंटित होते हैं जिससे सड़क, नाली, भवन मरम्मत और साफ-सफाई जैसे काम होते हैं। लेकिन, राशि नहीं मिलने से अब ये काम नहीं हो पा रहे हैं।