होटल में काम करने वाले भवानी सिंह के मुताबिक यहां कांग्रेस भाजपा से ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवार का जोर है। कहते हैं कि दोनों पार्टियों को आजमा कर देख लिया। लेकिन सोहनलाल कहते हैं कि भाजपा कांग्रेस में टक्कर है, लेकिन इस सीट पर भाजपा के मुकाबले कांग्रेस कुछ कमजोर है।
साथ ही सोहनलाल यह भी जोड़ते हैं कि यहां भले ही भाजपा भारी हो, लेकिन जयपुर और उसके आगे कांग्रस का जोर ज्यादा है। उनकी बात का समर्थन राजस्थानी जैकेट और एंटीक बेचने वाले बीरबल भी करते हैं। कहते हैं कि इस बार कांग्रेस की हवा ज्यादा दिख रही है।
कोटपूतली में भाजपा कार्यकर्ता रमेश कुमार से मुलाकात होती है। रमेश मानते हैं कि शुरुआती दौर में सरकार से नाराजगी और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से पार्टी पिछड़ रही थी, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिन रात मेहनत करके मुकाबले को कड़ा बना दिया है। अब रूठे हुए पार्टी कार्यकर्ता भी सक्रिय हो गए हैं।
रमेश के मुताबिक भामाशाह कार्ड के जरिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हर परिवार में महिलाओं को मुखिया बना दिया है। इससे महिला सशक्तिकरण तेज हुआ और महिलाओं के बीच मुख्यमंत्री की लोकप्रियता बढ़ी है और अगर महिलाएं भाजपा के साथ एकमुश्त आ गईं तो दोबारा सरकार बनने से कोई रोक नहीं सकता।
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वहीं जयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ता सुनील शर्मा कहते हैं कि राजस्थान में सबसे बड़ा मुद्दा किसानों की बदहाली, बिजली का संकट, बेरोजगारी, व्यापार का चौपट होना और खराब जनसेवाएं हैं। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किसानों की कर्ज माफी का जो वादा किया है,उसने राज्य के किसानों में एक उम्मीद जगा दी है।
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सुनील का दावा है कि किसानों और युवाओं का एकमुश्त समर्थन कांग्रेस को मिल रहा है और सूबे में कांग्रेस सरकार बनना तय है। दावे प्रति दावे अपनी जगह हैं, लेकिन महिलाओं में वसुंधरा की अपील और किसानों में राहुल गांधी की कर्ज माफी का असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। लोग जाति और धर्म की नहीं अपने क्षेत्र के पिछड़ेपन और दूसरे जरूरी मुद्दों पर ज्यादा बात करते हैं।
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