ऐसा लग रहा है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव कमजोर दिलवालों के देखने का खेल नहीं नहीं। कम से कम चुना ड्यूटीवालों के लिए तो बिलकुल नहीं।
हो ये रहा है कि जिन कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी पर लगाया हुआ है, उनमें से 65 प्रतिशत ने खुद को दिल का रोगी बताते हुए, चुनावी ड्यूटी निरस्त करने की अर्जा लगाई है।
आने वाली अर्जियों में 70 फीसदी ने अपने-आपको रोगी बताया है, इनमें से दिल के रोगियों का प्रतिशत इतना बड़ा है। हालांकि बचे पांच प्रतिशत में से कुछ को मां-बाप की सेवा करनी है, तो कुछ को बाहर के खाने और पानी से परेशानी है।
कुछ को लगातार चार-पांच घंटे चक्कर आते हैं, तो कुछ की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। कुछ ने ऐसा बहाना भी बनाया है, जिसमें विवाद होते ही उनकी कंपकंपी छूट जाती है।