राजस्थान विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के जोर-शोर से चल रहे प्रचार को देखकर मतदाताओं को लग रहा होगा कि करोड़ों बहाए जा रहे हैं, लेकिन कागज इस बात को झुठला रहे हैं।
प्रत्याशियों की ओर से चुनावी खर्च का दिया गया ब्यौरा बता रहा है कि एक-दो लाख रुपए हों, तो भी चुनाव लड़ा जा सकता है। चुनाव आयोग को जयपुर के प्रत्याशियों की ओर से सौंपा गया व्यय आश्चर्यचकित कर देनेवाला है।
प्रत्याशियों को टिकट मिले बीस दिन होने को आए, लेकिन प्रचार पर खर्च चंद हजार ही हुए हैं। राजस्थान में मतदान 1 दिसम्बर को है और अब प्रचार के बमुश्किल आठ दिन ही बचे हैं।
अब तक के प्रचार की बात करें, तो जयपुर की मालवीय नगर विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अर्चना शर्मा ने मात्र 18 हजार रुपए ही प्रचार पर खर्च किए हैं।
लोगों में चर्चा है कि प्रचार के लिए लक्जरी गाड़ी और काफिला देखकर ऐसा लग तो नहीं रहा। सबसे अधिक खर्च करनेवाले भी सांगानेर सीट से कांग्रेस के ही प्रत्याशी संजय बाफना हैं।
इन्होंने अब तक पौने दो लाख रुपए खर्च किए हैं। इसके बाद अधिक खर्च करनेवालो में कांग्रेस के किशनपोल सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी अमीन कागजी हैं, प्रचार पर इनके 1.37 लाख रुपए ही खर्च हुए हैं।
विद्याधर नगर सीट से भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह, बगरू सीट से कांग्रेस प्रत्याशी प्रहलाद रघु, झोटवाड़ा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रेखा कटारिया, आदर्श नगर सीट से अशोक परनामी जैसे नेताओं ने अब तक 50 हजार रुपए तक भी खर्च नहीं किए हैं।
बगरू से भाजपा के कैलाश वर्मा, मालवीय नगर से भाजपा के कालीचरण सराफ, हवामहल सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेन्द्र पारीक व कांग्रेस के बृजकिशोर शर्मा, आदर्श नगर से कांग्रेस प्रत्याशी माहिर आजाद का प्रचार पर खर्चा एक लाख रुपए को नहीं छू पाया है।