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राजस्थान चुनाव में जांच एजेंसियों के सहारे पासा पलटने की फिराक में भाजपा

Sun, 02 Dec 2018 10:22 AM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली   
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CBI
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राजस्थान चुनाव में वोटिंग की तिथि यानी सात दिसंबर नजदीक आ पहुंची है। कांग्रेसी खेमे से जुड़े लोगों पर जांच एजेंसियां किसी न किसी मामले में शिकंजा कसती नजर आ रही हैं।शुक्रवार को ईडी ने रॉबर्ट वाड्रा को सम्मन भेजा था तो वहीं शनिवार को कांग्रेस पार्टी के वयोवृद्ध नेता मोतीलाल वोरा और लगातार 10 साल तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ सीबीआई ने एजेएल मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है।राजस्थान चुनाव में भूपेंद्र सिंह हुडा कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारक हैं। कांग्रेस ने हुडा को जाट बाहुल्य इलाकों में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी है।
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भाजपा ने शुक्रवार को दामादश्री यानी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी के बहनोई राबर्ट वढेरा को घेर कर कांग्रेस के गिरेबां तक पहुंचने का दांव खेला था।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीकानेर के भूमि घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच को लेकर रॉबर्ट वाड्रा को तलब किया है।मामले की जांच के लिए वाड्रा को अगले सप्ताह ईडी के समक्ष पेश होना है।भारतीय जनता पार्टी ने इसी मुदे पर रॉबर्ट वाड्रा सहित गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी को घेरने का प्रयास शुरु कर दिया है; भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने तो थोडी देर बाद ही बयान जारी कर दिया था कि पूरा गांधी परिवार ही भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है।   

शनिवार सुबह सीबीआई ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और एजेएल के अध्यक्ष मोतीलाल वोरा के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर दिया है।भाजपा नेताओं को लग रहा है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई से कहीं न कहीं कांग्रेस पार्टी की छवि खराब होगी। इसका थोड़ा बहुत असर वोटिंग पर पड सकता है। झुंझुनू, नागौर, सीकर, भरतपुर और जोधपुर आदि इलाकों में जाटों की अच्छी खासी तादाद है। शेखावटी क्षेत्र में भाजपा ने आठ, जबकि कांग्रेस पार्टी ने सात सीटों पर जाट समुदाय के नेताओं को टिकट दी है।पूरे राजस्थान की बात करें तो जाटों की आबादी 12-14 फीसदी है, लेकिन इनके वोट किसी एक ही पार्टी के खाते में जाते हैं।ऐसे कम ही मौक़े आए हैं जब यहाँ के जाटों के वोट अलग अलग पार्टियों के पक्ष में गए हों।
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जाट नेता जीआर पूनिया का मानना है कि इस बार जाट समुदाय कांग्रेस पार्टी के पक्ष में जा सकता है।चुनावी माहौल में भूपेंद्र सिंह हुड्डा या वाड्रा के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, इस सवाल पर पूनिया का बड़ा स्पष्ट जवाब था।उन्होंने कहा, इसका वोटिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा।सब जानते हैं कि कार्रवाई बदले की भावना से हो रही है।दूसरे कांग्रेसी नेता प्रकाश बेनीवाल का दावा है कि भाजपा ने जाटों के लिए कुछ नहीं किया।इस बार जाट वोट कांग्रेस के ही पाले में जाएंगे।

शिव सीट से भाजपा के मौजूदा विधायक मानवेंद्र सिंह अक्तूबर में 10 बड़े जाट नेताओं के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे।इनमें नारायण राम बेड़ा, सुमित्रा सिंह, ऊषा पूनिया, ज्ञानप्रकाश पिलानिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीप धनखड़, पूर्व सांसद हरिसिंह, सुभाष महरिया, पूर्व विधायक रणवीर पहलवान, जीतराम डूडी आदि प्रमुख थे।मान्वेंद्र सिंह का कहना था कि जाट और राजपूत समुदाय कांग्रेस के पक्ष में वोट देने का मन बना चुके हैं।

जाट-राजपूत समीकरण अपना रंग दिखा चुका है...

जाट राजपूत समीकरण राजस्थान की राजनीति में पहले भी अपना रंग दिखा चुका है।1980 के दशक में किसी समय के धुर विरोधी रहे जाट नेता नाथूराम मिर्धा एवं राजपूत नेता कल्याण सिंह कालवी के बीच समन्वय कायम हुआ।अब मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का राजस्थान के जाटों में खासा असर माना जाता है।उनके पुत्र एवं रोहतक लोकसभा क्षेत्र से सांसद दीपेंद्र हुड्डा की भी राजस्थान में राम प्रकाश मिर्धा की बेटी श्वेता के साथ शादी हुई है।श्वेता की बहन ज्योति 15 वीं लोकसभा में नागौर से सांसद रही हैं।इनके परिवार का राजस्थान के जाट समुदाय में अच्छा असर माना जाता है।यही वजह है कि हुड्डा राजस्थान में कई दौरे कर चुके हैं।अभी कई इलाक़ों में उनकी जनसभा प्रस्तावित हैं।
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