राजस्थान में पकड़े गए अधिकारियों और कर्मचारियों का चेहरा अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी नहीं दिखाएगी। उनके विभाग का नाम और पद ही सार्वजनिक किया जाएगा। बुधवार को एसीबी डीजी का अतिरिक्त पदभार ग्रहण करने के बाद हेमंत प्रियदर्शी ने यह आदेश जारी किया है। जिसे लेकर खूब चर्चा हो रही है।
आदेश में एसीबी चौकी प्रभारियों से साफ कहा गया है कि ब्यूरो टीम द्वारा की गई ट्रेप कार्रवाई से पहले जब तक प्रकरण/ आरोपी का न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध नहीं हो जाता तब तक आरोपी/ संदिग्ध का नाम और फोटो मीडिया या अन्य किसी व्यक्ति, विभाग में सार्वजनिक नहीं किया जायेगा। आरोपी जिस विभाग में कार्यरत है उसका नाम और आरोपी का पदनाम की सूचना ही मीडिया में सार्वजनिक की जाएगी।
हेमंत प्रियदर्शी द्वारा जारी किए गए आदेश में यह भी कहा गया है कि ब्यूरो की अभिरक्षा में जो भी संदिग्ध या आरोपी है, उसकी सुरक्षा और मानवाधिकार की रक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी ट्रेपकर्ता अधिकारी की ही होगी।
आदेश को लेकर भाजपा अध्यक्ष सतीन पूनिया ने ट्वीट कर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस भ्रष्टन की, भ्रष्ट कांग्रेस के। इसे अलावा भाजपा नेता राजेंद्र राठौर ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा है। कांग्रेस का हाथ - भ्रष्टाचार के साथ, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के तथाकथित मॉडल स्टेट राजस्थान में भ्रष्टाचारियों को अभयदान देने के लिए अब उनके फोटो व नाम को मीडिया में उजागर नहीं करने का तुगलकी फरमान निकालकर प्रेस की स्वतंत्रता का हनन किया जा रहा है। अपने नीतिगत दस्तावेज जनघोषणा पत्र के पृष्ठ संख्या 36 के बिंदु संख्या 28 में 'Zero Discretion, Zero Corruption and Zero Tolerance' के सिद्धांत पर काम करने के वादे को धूलदर्शित कर चुकी गहलोत सरकार का यह आदेश इस बात का प्रमाण है कि एसीबी अब भ्रष्टाचारियों की ढाल बनकर कार्य करेगी।
गहलोत सरकार में भ्रष्टाचारियों को पूरी तरह से राजनीतिक संरक्षण
भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने कहा- इस सरकार में भ्रष्टाचारियों को पूरी तरह राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है। गहलोत सरकार ने पहले भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति देने में ढिलाई बरती। अब इस तरह का आदेश जारी करके अधिकारी-कर्मचारियों को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट देने की तैयारी कर ली है। क्योंकि कोर्ट में आरोप साबित होने में काफी वक्त लग जाता है और लचर अनुसंधान के कारण काफी लोग बरी भी हो जाते हैं। चतुर्वेदी ने कहा- अभी कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इसीलिए भ्रष्टाचार करने से थोड़ा-बहुत डरता है कि मीडिया में नाम आने और फोटो छपने से बदनामी हो जाएगी। ACB शिकायत की पुष्टि करने के बाद ही किसी अधिकारी या कर्मचारी को ट्रैप करने की कार्यवाही करती है। इसलिए इस तरह का आदेश निकालना सीधे-सीधे भ्रष्टाचार को संरक्षण देना है।
केंद्र का हिसाब देने की बजाय BJP राजस्थान सरकार पर झूठे आरोप लगाती है
गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा- " भ्रष्टाचारियों को पकड़ने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में राजस्थान सरकार देश में अव्वल है । बीजेपी ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार में डूबी रही है। इसलिए जब भी बीजेपी को मौका मिलता है, केंद्र की सरकार का हिसाब देने की बजाय राजस्थान सरकार पर झूठे आरोप लगाती है।
राजस्थान सरकार पिछले 4 साल से जिस तरह से काम कर रही है, मैं बीजेपी नेताओं को बताना चाहता हूं आगे भी उसी तरह एक्शन जारी रहेगा।"
एसीबी मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आती है
खाचरियावास ने कहा- "एसीबी मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आती है। खुद CM भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए एक्शन प्लान को सख्ती से अंजाम देते हैं। ऐसे में यदि किसी अधिकारी ने आदेश निकाले हैं, तो मुख्यमंत्री को इस मामले में मंत्री होने के नाते हम अवगत कराएंगे। हमें भी पत्रकारों से यह बात पता चली है। इतना कह सकता हूं भ्रष्टाचार के मामले में पहले से भी मजबूत कार्रवाई नजर आएगी।"