13 अप्रैल 2021 को पीड़िता ने की थी आत्महत्या।
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चित्तौड़गढ़ जिले में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और ब्लैकमेल करने से परेशान युवती के जहर खाकर आत्महत्या करने के मामले में कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय क्रमांक - 2 चित्तौड़गढ़ के न्यायाधीश विनोद कुमार बैरवा ने पीड़िता के मृत्युकालीन बयानों को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। जिसके आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
अपर लोक अभियोजक अब्दुल सत्तार खान ने बताया कि चित्तौड़गढ़ शहर में रहने वाले एक व्यक्ति ने सांवलिया थाने में 13 अप्रैल 2021 को एक लिखित रिपोर्ट दी। इसमें बताया कि उसकी बेटी ने जहरीली पदार्थ खा लिया है। घर पहुंचने पर बेटी ने बताया कि वह कस्बा चौकी चित्तौड़गढ़ के पीछे रहने वाले सद्दाम पुत्र मोहम्मद हुसैन उर्फ बबलु शाह से परेशान हो गई है। अभियुक्त ने ब्लैकमेल कर 70-80 हजार रुपये घर से मंगवा लिए और होटल में ले जाकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म भी किया। बेटी की इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। पिता की शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया।
अभियोजक अब्दुल सत्तार खान ने बताया कि इस मामले का महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि पीड़िता का मौत से पहले उप अधीक्षक राजेश कसाना ने उसके बयान दर्ज किया था। जिसमें पीड़िता ने आरोपी सद्दाम के ब्लैकमेल करने की वजह से जहरीला पदार्थ खाने की बात कही थी। पर्चा बयान के वक्त अस्पताल चौकी पर तैनात महिला कांस्टेबल ने मोबाइल से बयान को रिकॉर्ड किया और उसकी सीडी जांच अधिकारी को सौंपी।
पुलिस जांच में भी सामने आया कि शादी का झांसा देकर पीड़िता साथ दुष्कर्म किया गया और बाद में अभियुक्त युवती को ब्लैकमेल करने लगा। मृतका के मृत्यु पूर्व दिए बयानों को न्यायालय महत्वपूर्ण दस्तावेज माना। न्यायालय के फैसला सुनाते हुए कहा कि 'जीवन के अंतिम समय में कोई व्यक्ति झूठ को अपने मुंह में लेकर नहीं जाता है। मरने वाला व्यक्ति उस समय सत्य ही बोलता है।
प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गवाहों में से मृतका के माता-पिता, भाई, मेडिकल साक्षी, अनुसंधान अधिकारी की गवाही को भी महत्वपूर्ण माना। अपर लोक अभियोजक की और से प्रस्तुत 24 गवाह, 46 दस्तावेज का अवलोकन करने के बाद बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अभियुक्त को दोषी माना। न्यायालय ने अभियुक्त सद्दाम हुसैन को धारा 306 आईपीसी में वर्ष 10 का कठोर कारावास और 25 हजार रुपए जुर्माना और धारा 376 आईपीसी में 7 वर्ष का कठोर कारावास और 25 हजार रुपए अर्थदंड सुनाया।