देशभर में जहां नवजातों की मौत पर लगाम लगाने के लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं वहां राजस्थान के अस्पतालों में सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट बुरी अवस्था में काम कर रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीते साल राज्य की कुल 36 एसएनसीयू में 5371 बच्चों की मौत हो गई। नवजातों की यह मृत्यु दर 8 फीसदी के करीब है जिसे राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में काफी चिंताजनक माना जा सकता है।
राजस्थान में नवजात बच्चों की मौत का यह आंकड़ा हर साल बढ़ता जा रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार राज्य के विभिन्न शहरों में कुल 36 एसएनसी यूनिट हैं। SNCU को स्थापित करने का लक्ष्य राज्य में नवजात बच्चों की मृत्यु दर कम करना था, लेकिन भारी भरकम खर्च के बावजूद ये अपने मकसद में कामयाब होती नहीं दिख रही हैं।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकडों पर गौर करें तो पिछले साल एसएससीयू में कुल 64,630 बच्चों को भर्ती कराया गया था। इनमें से 5,371 बच्चों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जबकि 7,445 बच्चों को हालत बिगड़ने पर हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया। यह हाल तब है राज्य की इन SNCUमें समस्त हाइटेक सुविधाएं दी गई हैं। अजमेर में स्थापित SNCU में भी कई बच्चों की मौत हो चुकी है।
मामले में विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। जिला कांग्रेस ने शहर के जेएलएन हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा एक ही राज्य में पांच शिशुओं ने अस्पताल में दम तोड़ दिया क्योंकि वरिष्ठ डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। आरोप लगाया कि ठीक से देखभाल न होने के कारण SNCU में बच्चों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।