राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के बयान को भ्रामक और तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि भाजपा महिलाओं के नाम पर केवल राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।
महिला आरक्षण लागू करने में देरी पर उठाए सवाल
जूली ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने में देरी के पीछे असली कारण परिसीमन से जुड़ी रणनीति है। उनके अनुसार, नरेंद्र मोदी सरकार ऐसी व्यवस्था लाना चाहती है जिसमें जातिगत जनगणना के आंकड़ों की जरूरत न पड़े, जिससे चुनावी क्षेत्रों में मनमानी की जा सके। उन्होंने इसे “छिपा हुआ एजेंडा” बताते हुए कहा कि विपक्ष इसी का विरोध कर रहा है।
कांग्रेस ने बताया कमजोर वर्गों के अधिकारों का रक्षक
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस दलित, ओबीसी और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी स्थिति में उनके हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार पर संविधान की मूल भावना को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।
विधेयक को तुरंत लागू करने की मांग
जूली ने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि 2023 में संसद से पारित महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष इसके पक्ष में है, लेकिन सरकार इसे जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया में उलझाकर टाल रही है।
सरकार पर इवेंट मैनेजमेंट की राजनीति का आरोप
उन्होंने सरकार पर 'इवेंट मैनेजमेंट और पीआर की राजनीति' करने का आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर भी सरकार सर्वसम्मति से आगे बढ़ने में विफल रही है। जूली ने नैतिकता के आधार पर प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जो सरकार आधी आबादी को उनके अधिकारों से वंचित रखे, उसे सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है।
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कांग्रेस के योगदान का किया उल्लेख
कांग्रेस की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को मतदान का अधिकार, पंचायतों में आरक्षण और देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जैसे उदाहरण कांग्रेस की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के योगदान को भी याद किया।