एआईसीसी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा- देश के लोग जानना चाहते हैं कि विदेशी शेल कंपनियों से भारत आने वाले काले धन का असली मालिक कौन है? कैसे एक संदिग्ध साख वाला समूह, जिस पर टैक्स हेवन देशों से संचालित विदेशी शेल कंपनियों से संबंधों का आरोप है, भारत की संपत्तियों पर एकाधिपत्य स्थापित कर रहा है और इस सब पर सरकारी एजेंसियां या तो कोई कार्रवाई नहीं कर रही हैं या इन सब संदिग्ध गतिविधियों को ही सुगम बनाने में जुटी हैं। देश जानना चाहता हैं कि प्रधानमंत्री ने एक मित्र पूंजीपति को विश्व के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बनाने में मदद क्यों की और वे इस गंभीर अंतर्राष्ट्रीय खुलासे पर चुप क्यों हैं?
संसद में कांग्रेस की आवाज दबाई जा रही, तो जनता में उठा रहे मुद्दा
गौरव वल्लभ ने पीसीसी में मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और कांग्रेस नेता आरसी चौधरी के साथ शुक्रवार को प्रेसवार्ता की। उन्होंने कहा- एआईसीसी देशभर के राज्यों में इस मुद्दे को उठा रही है क्योंकि संसद में कांग्रेस सांसदों, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के सवालों का जवाब केंद्र सरकार नहीं दे रही है। कांग्रेस सांसदों के आरोपों को संसदीय कार्यवाही से हटा दिया जाता है। लेकिन इससे ये सवाल दबेंगे नहीं, हम जनता के बीच सवाल उठा रहे हैं। गौरव वल्लभ बोले- हम किसी व्यक्ति के दुनिया के अमीरों की सूची में 609 वें से दूसरे स्थान पर पहुँचने के ख़िलाफ़ नहीं हैं। लेकिन हम निस्संदेह सरकार की ओर से प्रायोजित निजी एकाधिकारों के ख़िलाफ़ हैं, क्योंकि वे जनता के हितों के खिलाफ होते हैं। हम मोनोपॉली के खिलाफ हैं। विशेष तौर पर हम टैक्स हेवन देशों से आपत्तिजनक संबंधों धोखाधड़ी और भ्रष्टाचारके आरोपों से घिरे एक ख़ास व्यक्ति द्वारा हमारी अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना और राष्ट्रीय संसाधनों का फायदा उठाते हुए मोनोपॉली स्थापित करने के ख़िलाफ़ हैं।
जेपीसी बनाने से क्यों डर रही मोदी सरकार - गौरव वल्लभ
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफेसर गौरव वल्लभ ने कहा- हम जानना चाहते हैं कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर जाँच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) बनाने से क्यों डर रही है , जबकि संसद के दोनों सदनों में उसका अच्छा बहुमत है। प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता में आने से पहले काला धन भारत वापस लाने और हर नागरिक के बैंक खाते में 15 लाख रुपए डालने का वादा किया था। लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। स्विट्ज़रलैंड के केंद्रीय बैंक के पिछले वार्षिक डेटा के मुताबिक 2021 में स्विस बैंकों में जमा भारतीय व्यक्तियों और कंपनियों का पैसा 14 वर्षों के उच्चतम स्तर 3.83 बिलियन स्विस फ्रैक्स (30,500 करोड़ रु. से अधिक) पर पहुँच गया है।
जब यह धोखाधड़ी हो रही थी तो सेबी (SEBI) क्या कर रहा था?
कांग्रेस प्रवक्ता बोले- अडानी समूह के ख़िलाफ़ स्टॉक में हेरफेर के आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद शेयरों की कीमतों में गिरावट से उन लाखों निवेशकों को नुकसान पहुँचा, जिन्होंने कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई कीमतों पर अडानी समूह के शेयरों में निवेश किया था। 24 जनवरी और 15 फ़रवरी 2023 के बीच अडानी समूह के शेयरों के मूल्य में 10 लाख 50 हजार करोड़ रुपए की गिरावट आई। 19 जुलाई, 2021 को वित्त मंत्रालय ने संसद में स्वीकार किया था कि अडानी समूह सेबी के नियमों का उल्लंघन करने के लिए जाँच के दायरे में है । फिर भी अडानी समूह के शेयरों की कीमतों में उछाल क्यों आने दिया गया। LIC द्वारा खरीदे गए अडानी समूह के शेयरों का मूल्य 30 दिसंबर, 2022 को 83 हजार करोड़ रुपए था, जो 15 फ़रवरी 2023 को घटकर 39 हजार करोड़ रुपए रह गया, यानि 30 करोड़ एलआईसी पॉलिसी धारकों की बचत के मूल्य में 44 हजार करोड़ रुपए शेयरों के मूल्यों में कमी आई और उस समूह द्वारा धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों के बाद भी मोदी सरकार ने एलआईसी को अडानी एंटरप्राइज़ेज़ के फ़ॉलो ऑन पब्लिक ऑफ़र (FPO) में अतिरिक्त 300 करोड़ रुपए निवेश करने के लिए मजबूर क्यों किया ?
अडानी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए बजट घोषणाएं कीं- गौरव वल्लभ
गौरव वल्लभ ने आरोप लगाया कि साल 2001 के केतन पारेख घोटाले में सेबी ने पता लगाया था कि शेयर बाज़ार में हेरफेर करने में अडानी समूह के प्रमोटरों ने साथ दिया था। मौजूदा आरोपों से यह और भी चिंताजनक है। लेकिन जाँच करने की बजाय प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल के मित्र काल बजट में अडानी समूह को और भी अवसर दिए। जिनमें- 14 जून, 2022 को अडानी समूह ने घोषणा की कि वह फ्रांस की टोटल एनर्जीज़ के साथ साझेदारी के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन में 50 बिलियन डॉलर का निवेश करेगा। 4 जनवरी, 2023 को ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 19,744 करोड़ रुपए की लागतके साथ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दे दी। 1 फ़रवरी को बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि अगले चरण में 50 और हवाई अड्डे, हेलीपोर्ट और वाटर एयरोड्रम को पुनर्जीवित किया जाएगा। इनमें से कितने अडानी को फायदा पहुँचाएंगे ?
संयोग है या प्रयोग ?
गौलव वल्लभ ने कहा- अडानी समूह बहुत ही कम समय में भारत के हवाई अड्डों का सबसे बड़ा संचालक बन गया है। इसने 2019 छह हवाई अड्डों के संचालन की अनुमति सरकार से ले ली और 2021 में यह समूह संदेहास्पद परिस्थितियों में भारत के दूसरे सबसे व्यस्त हवाई अड्डे, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर काबिज़ हो गया। आज अडानी समूह 13 बंदरगाहों और टर्मिनल्स को नियंत्रित करता है, जो भारत की बंदरगाह क्षमता का 30 प्रतिशत और कुल कंटेनर आवाजाही का 40 प्रतिशत है। क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से विवेकपूर्ण है कि धनशोधन और विदेश की शेल कंपनियों से लेन-देन के गंभीर आरोपों का सामना करने वाली एक कंपनी को एक सामरिक क्षेत्र में प्रभुत्व रखने की अनुमति दे दी जाए? वल्लभ बोले- मोदी जी ने अपने पास उपलब्ध सभी साधनों का इस्तेमाल करके बंदरगाहों के क्षेत्र में भी अडानी का आधिपत्य स्थापित करने में मदद की। 2021 में सार्वजनिक क्षेत्र का जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट महाराष्ट्र में दिघी बंदरगाह के लिए अडानी की प्रतिस्पर्धा में बोली लगा रहा था, लेकिन जहाज़रानी और वित्त मंत्रालयों के अचानक इरादा बदलने के बाद, उसे अपनी जीती हुई बोली वापस लेने को मजबूर होना पड़ा।
पीएम की विदेश यात्राओं में साथ गए गौतम अडानी- गौरव वल्लभ
उन्होंने कहा- रक्षा क्षेत्र यह सार्वजनिक जानकारी में है कि गौतम अडानी प्रधानमंत्री मोदी की अनेक विदेश यात्राओं में उनके साथ गए। 4-6 जुलाई, 2017 की इज़राइल यात्रा के बाद उन्हें भारत-इज़राइल रक्षा संबंधों के संदर्भ में एक लाभ दिलाने वाली भूमिका सौंप दी गई है। उन्होंने कोई पूर्व अनुभव न होते हुए भी ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, छोटे हथियार और विमान रखरखाव जैसे क्षेत्रों में संयुक्त उपक्रम स्थापित किए हैं, जबकि कई स्टार्ट-अप कंपनियां और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इन क्षेत्रों में कई वर्षों से हैं। विद्युत क्षेत्र-UPA ने वर्ष 2010 में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी द्वारा बगेरहाट, बांग्लादेश में 1,320 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने अपने मित्रों की मदद करने का निर्णय लिया और 6 जून, 2015 को उनकी ढाका यात्रा के दौरान यह घोषणा की गई कि अडानी पावर बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति झारखंड के गोड़ा में एक थर्मल पावर प्लांट का निर्माण करेंगे।