प्रसाद में मिलती है ये रोटी।
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मालासेरी का प्रसाद भी है खास
भगवान श्री देवनारायण जी के मंदिर से कई खास चीजें जुड़ी हुई है। जिसमें सबसे अहम है यहां भक्तों को मिलने वाला प्रसाद। यह कोई मिठाई नहीं बल्कि एक विशेष प्रकार की गेहू की चपाती (रोटी) है। अपने आकार वजन के कारण इस रोटी को भक्त भी आनंद के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। सालों से मंदिर इस परंपरा को निभा रहा है। जहां भगवान के भोग बाद सुबह 9 बजे से लेकर रात 9 बजे तक भक्तों को इसे प्रसाद के रूप में दिया जाता है। देवनारायण जन्म स्थली पर आए देव भक्तों को प्रसाद के रूप में हमेशा चूल्हे पर बनी गेहूं की चपाती और गरम-गरम खड्डी परोसी जाती है। ये चपाती सामान्य चपाती से बिल्कुल अलग है। ये गोलाकार में 2 फीट और मोटाई में आधा इंच की होती है। एक चपाती का वजन 4 किलो होता है। इसे चूल्हे पर बनाया जाता है।
इस तरह बनाया जाता है अनोखा प्रसाद
भगवान श्री देवनारायण की जन्म स्थली परिसर में स्थित भोजन शाला में चपाती बनाने से पहले मशीन द्वारा आटा लगाया जाता है। भोजन शाला में बनी एक भट्टी पर एक बड़ा चद्दर नुमा लोहे का तवा रखा हुआ है। जिसमें रसोईया बड़ी चपाती बनाता है। भोजन शाला में बनने वाले प्रसाद की देखरेख की जिम्मेदारी चुन्नीलाल के पास है। उन्होंने बताया कि पिछले 10 साल से सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक भोजनशाला चालू रहती है। यहां बनी पहली चपाती का भगवान श्री देवनारायण के भोग लगाने के बाद लोगों को खिलाया जाता है। हर दिन यहां हजारों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।
भाजपा ने पीएम मोदी के दौरे को लेकर शुरू की तैयारी।
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पीएम के दौरे को लेकर भाजपा नेता जुटे तैयारियों में
देवनारायण जन्म स्थली के पुजारी हेमराज पोसवाल समेत भाजपा नेताओं ने पीएम नरेंद्र मोदी को श्री देवनारायण जन्म स्थली आने का निमंत्रण भेजा है। पुजारी हेमराज पोसवाल ने बताया कि 22 से 28 जनवरी तक यहां पंचकुंडीय महायज्ञ और मुख्य मंदिर में कलश की पुर्नस्थापना होनी है। इसके समापन मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण दिया गया है।
भाजपा जिला अध्यक्ष लादूलाल तेली ने बताया कि प्रदेश संगठन स्तर के निर्देशों के अनुरूप मालासेरी में प्रधानमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्रीय मंत्री अर्जुन लाल मेघवाल दौरा कर व्यवस्थाओं की जानकारी लेकर तैयारियों करने निर्देश दे चुके हैं। पीएम मोदी के मोदी दौरे को लेकर अन्य तैयारियां भी की जा रही हैं।
राजस्थान की राजनीति पर क्या असर होगा?
गुर्जर समाज का राजस्थान में विधानसभा की 60 सीटों पर दबदबा है। ये 10 सीटों पर हार-जीत का फैसला करने की स्थिति में है। शेष 50 सीटों पर 15 हजार से 20 हजार की आबादी है। कहा जाता है कि प्रदेश का गुर्जर समाज एक जुट होकर वोट करता है। चुनावी साल में पीएम मोदी का गुर्जर समाज के धार्मिक स्थल पर आना सियासी संकेत भी दे रहा है। राजनीतिक गलियारों में भी उनके दौरे को लेकर चर्चा है।