भले ही राज्य सरकार और केंद्र सरकार किसानों को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं। मगर धरातल पर किसानों को फसल क्लेम के लिए हर रोज अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। प्राइवेट कंपनियों के मनमर्जी के आगे प्रशासन एक मात्र मूकदर्शक बन कर रह गया।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए गले की फांस बन गई। भले ही राज्य सरकार और केंद्र सरकार किसानों को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं। मगर धरातल पर किसानों को फसल क्लेम के लिए हर रोज अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। प्राइवेट कंपनियों के मनमर्जी के आगे प्रशासन एक मात्र मूकदर्शक बन कर रह गया।
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बता दें कि पूरे प्रदेश के किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा पॉलिसी एक गले की फंस बन गई। किसान आए दिन जिम्मेदार अधिकारियों के आगे-पीछे चक्कर काट रहे हैं। मगर निजी कंपनियों के आगे जिम्मेदार अधिकारी ही केवल मूकदर्शक बन कर रह गए।
नागौर जिले के 10 विधानसभा क्षेत्र से प्रत्येक दिन 20-30 किसान फसल बीमा पॉलिसी को लेकर जिला कलेक्टर के पास अपनी शिकायत को लेकर पहुंचते हैं। इस कड़ी में नागौर के कुम्हारी ग्राम पंचायत के किसान जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित के पास पहुंचे। कुम्हारी के ग्रामीणों का कहना है कि कुम्हारी ग्राम पंचायत समिति और उसके क्षेत्र में आने वाले किसानों का फसल बीमा को-ऑपरेटिव बैंक व प्राइवेट बैंकों के द्वारा किया जाता हैं।
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वर्ष 2023-2024 को सरकार ने अकाल घोषित करने के बावजूद मगर अभी तक किसानों को इसका मुआवजा नहीं मिला है, न तों फसल बीमा के रूपये इनके खाते में आये और ना ही अनुदान राशि इनको दी गई है। इस वर्ष भी समिति व ग्राम पंचायत कुम्हारी के क्षेत्र में आने वाले गावों में समय से बारिश नही होने के कारण सम्पूर्ण कांकड सूखी पड़ी रही, जिसे किसानों को काफी नुकसान हुआ है।