राजस्थान के जोधपुर स्थित गोयल अस्पताल दोनों नर्सिगकर्मियों की मौत के कारणों का खुलासा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पूणे से आई रिपोर्ट में हो गया। नर्सिंगकर्मी कांगो बुखार की चपेट में आ गए थे।
ये बुखार पाकिस्तान के कराची में फैल रहा है, जो थार एक्सप्रेस के जरिए जोधपुर पहुंच गया है। दोनों नर्सिंगकर्मियों के खंन के नमूनों के आधार पर पुणे से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रीमिन कॉन्गो हेमेरेजिक फीवर (सीसीएचएफ) दोनों मौतों का कारण रही।
बुखार की दहशत और अब मौत का सिलसिला
गौरतलब है कि इस बुखार के कारण जोधपुर में व दिल्ली स्थित एम्स में गोयल अस्पताल के एक-एक नर्सिंगकर्मी की मौत हो गई थी। हालांकि एका-एक बीमार पड़े अन्य तीन नर्सिंगकर्मियों में से दो को डेंगू की पुष्टि हुई है तथा एक स्वस्थ है। एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम ने गोयल अस्पताल के संचालक डॉ. आनंद गोयल से भी पूछताछ की।
अस्पताल की उस इमारत पर भी ताला लगा दिया, जहां आईसीयू है। अस्पताल के आस-पास के 500 घरों के सर्वे के बाद मरीजों के घर, उनके मकान व पाली में संदिग्ध मरीज के घर का सर्वे कराया। विशेष सूट पहनाकर मृत नर्सिंगकर्मियों को दफनाया गया।
यह है कॉन्गो बुखार
यह घरेलू जानवरों के शरीर पर चिपके परजीवी कीड़े से फैलता है। कीड़े के काटने, पशुओं के स्त्राव और टिश्यू के संपर्क में आने से इंसानों में यह रोग आ जाता है।
पीडि़त मरीजों के खून और अन्य स्त्राव के संपर्क में आने से बीमारी एक से दूसरे में फैल जाती है। तेज बुखार के साथ बार-बार उल्टी होती है। पूरे शरीर में दर्द के बाद विभिन्न अंगों से रक्तस्त्राव और अंदरूनी ब्लीडिंग भी होती है। लीवर तक क्षतिग्रस्त हो सकता है।