राजस्थान में भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार ने एक बार फिर मंदिर को लेकर आरएसएस समेत कई हिंदूवादी संगठनों के विरोध का सामना करने की तैयारी कर ली है। दो साल में 65 मंदिर तोड़ने के बाद पिछले महीने चक्का जाम कर अपना विरोध दर्ज कराने के बाद हिंदू संगठन राजे से फिर नाराज हैं।
मेट्रो परियोजना के तहत एक और 150 साल पुराने मंदिर को हटाने का नोटिस जारी किया गया है। वहीं, मंदिर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले एकजुट होकर सरकार के खिलाफ फिर खड़े होने को लेकर बैठकें शुरू हो गई हैं।
मेट्रो प्रशासन भी इस पुराने मंदिर के साथ मेट्रो के रास्ते में आने वाले छोटे-छोटे करीब आधा दर्जन गणेशजी, शिवजी, हनुमानजी के मंदिर तोड़ने की तैयारी में है।
मेट्रो और यातायात सुगम करने के नाम पर दो साल में तोड़े गए 65 में से 23 मंदिर काफी पुराने थे। खासकर रोजगारेश्वर मंदिर 250 साल पुराना था। मेट्रो प्रशासन ने फिर बड़ी चौपड़ पर स्थित 150 साल पुराना गौरीशंकर महादेव मंदिर हटाने के लिए नोटिस जारी कर दिया है।
यह मंदिर अभी पुराने स्वरूप में ही है। जयपुर की स्थापना स्थापत्य और वास्तु के आधार पर की गई है। इसी के आधार पर छोटी चौपड़ पर रोजगारेश्वर मंदिर बनाया तो ठीक उसी की सीध में बड़ी चौपड़ पर गौरीशंकर महादेव मंदिर बना।