डॉ. आर्यन खान ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, गुरुजनों, और पढ़ाई के प्रति 'फोर डी' (डेडिकेशन, डिसिप्लिन, डिवोशन, डिटर्मिनेशन) के सिद्धांत को दिया। उन्होंने परीक्षा की तैयारी में निरंतरता और नियमित अध्ययन की महत्ता पर जोर दिया।
नीट पीजी टेस्ट में नागौर के डॉ. आर्यन खान ने प्रदेश में तीसरा तो नागौर जिले में पहला स्थान प्राप्त किया है। 99.91 परसेंटाइल हासिल कर ये कामयाबी हासिल की है। परिणाम घोषित होने के बाद जैसे ही डॉक्टर आर्यन खान की कामयाबी की खबर फैली रिश्तेदारों और शहवासियों की ओर से डॉक्टर आर्यन खान और उनके पिता शमशेर खान खोखर को बधाइयां मिलने का सिलसिला शुरू हो गया।
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मीडिया से रूबरू हुए डॉक्टर आर्यन खान ने कहा के उनके दादा-दादी माता-पिता भाई-बहन सबकी दुआओं का असर उनकी कामयाबी के रूप में देखने को मिला है और इसमें उनके गुरुजनों का मार्गदर्शन का भी अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दौरान वो हमेशा 'फोर डी' को साथ लेकर चले। डेडिकेशन, डिसिप्लिन, डिवोशन और डिटर्मिनेशन। एक्स्ट्रा पढ़ने के लिए लाइब्रेरी की भी मदद ली। अधिक से अधिक किताबों से स्टडी की। उन्होंने कहा की किसी भी परीक्षा में सफल होने के लिए निरंतरता बहुत महत्वपूर्ण है। छोटे-छोटे प्रयास हर दिन मायने रखते हैं।