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Navratri 2022: नवरात्र आज से शुरू, मेहरानगढ़ दुर्ग में मां चामुंडा के दर्शन करने के लिए उमड़ी श्रद्धालु की भीड़

Sat, 02 Apr 2022 02:52 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर

सार

आज से नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो गई। सुबह से ही मां के मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने के मिली। दो साल से कोरोना पाबंदियों के कारण ज्यादातर लोग मंदिरों में पहुंचकर मां के दर्शन नहीं कर पा रहे थे। 
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मां के दर्शन को उमड़ी भक्तों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ शनिवार को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हो गया है। कलश स्थापना के साथ आज से नवदुर्गा की पूजा प्रारंभ हो गई। यह पूरे नौ दिन तक जारी रहेगी। इस दौरान मां मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहेगा। 

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कोरोना महामारी के कारण दो साल से लोग नवरात्रि का पर्व घरों में ही मना रहे थे। लंबे इंतजार के बाद मिली छूट के कारण मां चामुंडा की आरती और दर्शन करने के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने के मिली। प्रशासन ने नवरात्रि के पर्व के लिए मेहरानगढ़ दुर्ग पर चाक चौबंद व्यवस्थाएं की गईं हैं। जगह-जगह बेरीकेट्स लगाने के साथ स्वास्थ्य सेवाएं और दर्शनार्थियों के लिए पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधा देने के इंतजाम किए गए हैं। 
 

जानें किस दिन मां के किस अवतार की होगी पूजा 

मां का किया गया श्रृंगार - फोटो : अमर उजाला
पहला दिन- मां शैलपुत्री: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन को प्रतिपदा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्त देवी शैलपुत्री की पूजा करते हैं। देवी शैलपुत्री के माथे पर अर्धचंद्र है और इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है। इन दिन कई भक्त अपने घरों में कलश स्थापना करते हैं। 

दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी: देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा दूसरे दिन की जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी ज्ञान और दृढ़ संकल्प का प्रतिनिधित्व करती हैं।

तीसरा दिन-मां चंद्रघंटा:  नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। चंद्रघंटा देवी बाघ की सवारी करती हैं। इनके माथे पर अर्धचंद्र है। चंद्रघंटा नाम का अर्थ है जिसके माथे पर चंद्रमा है। मां चंद्रघंटा शांति का प्रतिनिधित्व करती हैं।
 

व्यवस्था बनाने के लिए प्रशासन ने लगाए बेरीकेट्स। - फोटो : अमर उजाला
चौथा दिन- देवी कूष्मांडा: चौथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि देवी ने ब्रह्मांड के निर्माण में योगदान दिया था। देवी दुर्गा का ये रूप सिंह पर सवार है और इनके आठ हाथों में एक माला के अलावा सात घातक हथियार हैं।

पांचवा दिन- स्कंदमाता:  पांचवें दिन भक्त देवी स्कंदमाता की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि मां स्कंदमाता भक्तों की आत्मा को शुद्ध करती हैं। इनकी गोद में इनका पूत्र स्कंद होता है। चार भुजाओं वाली देवी हाथों में कमल धारण करती हैं और अन्य दो हाथ में पवित्र कमंडल और एक घंटी है।

छटा दिन- देवी कात्यायनी: देवी कात्यायनी की अराधना नवरात्र के छठे दिन की जाती है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर राक्षस का वध करने के लिए मां पार्वती ने कात्यायनी का रूप धारण किया था।
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सातवां दिन-कालरात्रि:  मां कालरात्रि को देवी दुर्गा का सबसे उग्र और सबसे हिंसक रूप माना जाता है। इनकी पूजा नवरात्रि के सातवें दिन की जाती है।

आंठवा दिन-महागौरी: इस दिन महागौरी देवी की पूजा की जाती है। माता महागौरी पवित्रता और शांति का प्रतीक हैं। देवी दुर्गा के भक्त उनके आशीर्वाद लेने के लिए महाअष्टमी पर उपवास रखते हैं।

नौवां रूप-देवी सिद्धिदात्री: नवरात्रि के अंतिम यानी नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इन कन्या पूजन किया जाता है। सबसे पहले भक्त नौ छोटी कन्याओं के पैर धोते हैं और फिर उन्हें भोजन कराते हैं।
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