सार
कुचेरा नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस के सामने अपना मजबूत गढ़ बचाने की चुनौती है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 25 में 22 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा खाता नहीं खोल सकी थी। इस बार भाजपा 13 सीटों के बहुमत लक्ष्य के साथ मैदान में है।
राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में प्रदेश के चर्चित और हॉट स्पॉट इलाकों में इस बार कुचेरा नगरपालिका भी शामिल है। इसकी बड़ी वजह पिछला चुनाव परिणाम है। 25 वार्डों वाली कुचेरा नगरपालिका में कांग्रेस ने 22 सीटें जीतकर बोर्ड बनाया था, जबकि भाजपा एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। ऐसे में इस बार भाजपा के सामने शून्य से शुरुआत कर बोर्ड बनाने की चुनौती है, जबकि कांग्रेस अपने मजबूत गढ़ को बचाने के लिए मैदान में उतरी है।
नगरपालिका में बोर्ड बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 13 सीटों का है। भाजपा के लिए यह चुनाव इसलिए अहम है, क्योंकि पिछली बार खाता नहीं खुलने के बाद इस बार पार्टी का लक्ष्य कम से कम 13 वार्डों में जीत दर्ज करना है। वहीं कांग्रेस पिछले चुनाव के प्रदर्शन को दोहराकर अपना बोर्ड बरकरार रखने की कोशिश में जुटी है।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और प्रत्याशियों के मैदान में उतरने के साथ ही दोनों दलों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। कुछ दिन पहले रात में पर्चे वितरण की घटना के बाद यहां राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया था। ताकतवर राजनीतिक परिवारों के प्रभाव और पिछले चुनाव के नतीजों ने कुचेरा को इस बार खासा महत्वपूर्ण बना दिया है।
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निवर्तमान अध्यक्ष तेजपाल मिर्धा का कहना है कि पिछले चुनाव में जनता ने कांग्रेस पर भरोसा जताया था। इस बार भी बोर्ड के कार्यकाल में हुए 1900 विकास कार्यों और जनहित के मुद्दों को लेकर हम जनता के बीच जाएंगे। कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के समर्थन पर पूरा भरोसा है।”
पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता रिछपाल सिंह मिर्धा ने कहा, “कुचेरा में इस बार जनता बदलाव करेगी। इसी उम्मीद से पूरी तैयारी के साथ मैदान संभाल लिया है। कार्यकर्ता हर वार्ड में जाकर स्थानीय समस्याओं को समझ रहे हैं। सभी 25 वार्डों में मजबूती से चुनाव लड़ा जाएगा। भाजपा का लक्ष्य स्पष्ट है और तैयारी भी पूरी है।”
पिछले चुनाव के आंकड़ों और राजनीतिक परिवारों के वर्चस्व के कारण कुचेरा इस बार प्रदेशभर की नजरों में है। कांग्रेस के सामने अपने गढ़ को बचाने की चुनौती है, जबकि भाजपा शून्य से शुरुआत कर 13 सीटों के बहुमत तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर मैदान में है। ऐसे में चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि कुचेरा में कांग्रेस का दबदबा कायम रहता है या भाजपा नया राजनीतिक समीकरण बनाने में सफल होती है।