राजस्थान के ऐतिहासिक नागौर शहर में करीब 1000 साल पुराना श्री गोपीनाथ मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए खास पहचान रखता है। आम तौर पर हिंदू धर्म और वैदिक मान्यताओं में खंडित मूर्ति की पूजा करना उचित नहीं माना जाता, लेकिन इस मंदिर में पिछले कई सौ वर्षों से भगवान गोपीनाथ की खंडित प्रतिमा की ही रोजाना पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिर प्रबंधन समिति के रिकॉर्ड और स्थानीय पुजारियों के अनुसार, आज भी दूर-दूर से श्रद्धालु यहां भगवान गोपीनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
हमले में खंडित हो गई थी भगवान गोपीनाथ की प्रतिमा
मंदिर के मुख्य पुजारियों और ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, मध्यकाल में आक्रमणकारियों के हमलों के दौरान इस मंदिर को भी नुकसान पहुंचा था। इसी दौरान भगवान गोपीनाथ की प्रतिमा का एक हिस्सा खंडित हो गया था। प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने के बाद तत्कालीन सेवायत पुजारी ने परंपरा के अनुसार खंडित मूर्ति को पवित्र जल में विसर्जित करने की तैयारी की। इसके साथ ही नई प्रतिमा बनवाकर उसे गर्भगृह में स्थापित करने का फैसला किया गया था। हालांकि, नई प्रतिमा स्थापित होने से पहले ही मंदिर से जुड़ी एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने इस परंपरा को हमेशा के लिए बदल दिया।
पुजारी को सपने में मिले भगवान गोपीनाथ के दर्शन
मंदिर के सेवायतों की ओर से लिखे गए इतिहास के अनुसार, जब पुरानी प्रतिमा को हटाने और नई प्रतिमा लाने की तैयारी चल रही थी, तभी भगवान गोपीनाथ ने तत्कालीन पुजारी को सपने में दर्शन दिए। मान्यता के मुताबिक, भगवान ने पुजारी को प्रतिमा का विसर्जन नहीं करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि वह इसी खंडित रूप वाली प्रतिमा में भी विराजमान रहेंगे और भक्तों की पूजा स्वीकार करेंगे। पुजारी ने इस सपने की बात दूसरे सेवायतों को बताई। इसके बाद सभी की सहमति से नई प्रतिमा स्थापित करने का फैसला रद्द कर दिया गया।
कई सौ साल से इसी प्रतिमा की हो रही पूजा
मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय लोगों के अनुसार, उस घटना के बाद से आज तक इसी खंडित प्रतिमा की रोजाना पूरे विधि-विधान से पूजा और शृंगार किया जा रहा है। मंदिर में भगवान गोपीनाथ की पूजा के साथ नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान भी होते हैं।
नागौर और आसपास के इलाकों से हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गोपीनाथ के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों की आस्था है कि भगवान खंडित रूप में पूजे जाने के बावजूद अपने दरबार में आने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं।
जन्माष्टमी पर उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
मंदिर प्रशासन के अनुसार, जन्माष्टमी समेत दूसरे बड़े धार्मिक त्योहारों के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। इन मौकों पर हजारों भक्त मंदिर पहुंचकर भगवान गोपीनाथ के दर्शन करते हैं।
करीब एक हजार साल पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत के साथ इस अनोखी पूजा परंपरा के कारण भी श्रद्धालुओं के बीच खास महत्व रखता है। खंडित प्रतिमा की पूजा से जुड़ी यह मान्यता आज भी मंदिर की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा बनी हुई है।