पेपर लीक के विरोध में राजस्थान सरकार के खिलाफ 12 दिन से जयपुर में धरने पर बैठे भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सांसद मीणा ने कहा कि जब सतीश पूनिया मुझसे मिलने आए थे तो उन्होंने कहा था कि कल से पूरे प्रदेश में युवा मोर्चा का विरोध प्रदर्शन शुरू होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
मीणा ने कहा कि जिस मुद्दे पर सतीश पूनिया की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी को खड़ा होना था। मुझे दुख है कि उस मजबूती से सतीश पूनिया और भाजपा खड़ी नहीं हुई। सतीश पूनिया के पास राजस्थान भाजपा की जिम्मेदारी है। वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, इसके बाद भी वे इस मामले पर बिल्कुल भी आक्रामक नजर नहीं आए।
दरअसल, 31 जनवरी को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु शर्मा के साथ धरना स्थल पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सांसद किरोड़ी लाल मीणा से मुलाकात की थी, लेकिन भाजपा की ओर से इस प्रदर्शन को लेकर कोई एक्शन नहीं लिया गया। जिस पर नाराजगी जाहिर करते हुए शनिवार को सांसद मीणा ने सतीश पूनिया पर हमला बोला है। सांसद मीणा ने इस मामले की जानकारी भाजपा आलाकमान के भी दी है।
बतादें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बोलते हुए प्रदेश भाजपा पर खूब हमला बोला था। गहलोत ने कहा था कि आपने (भाजपा) खूब देख लिया, 4 साल निकाल दिए, विपक्ष की क्या भूमिका निभाई है। जन आक्रोश यात्रा निकाली, लेकिन मैं पूछना चाहूंगा कि कहीं जन दिखा, कहीं आपको आक्रोश दिखा? ना जन था और ना आक्रोश था, लोग पूछ रहे थे कि आक्रोश किस बात का है ये तो बताओ, हम तो संतुष्ट हैं।
इधर, राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने पिछले 12 दिन से सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वे जयपुर के आगरा रोड़ पर धरना स्थल पर बैठे थे। शनिवार को मीणा अपने समर्थकों के साथ जयपुर के शहीद स्मारक के लिए रवाना हो गए। जहां आज वे गृह राज्य मंत्री राजेंद्र यादव से बातचीत करेंगे। मीडिया से बात करते हुए मीणा ने कहा कि जब तक सरकार युवाओं की चार मांगों को पूरा नहीं कर देती। हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
क्या हैं सांसद की चार प्रमुख मांगें
- रीट, कांस्टेबल, RAS समेत 16 भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक हुए हैं। जिनसे 50 लाख से ज्यादा युवाओं का भविष्य असमंजस की स्थिति में आ गया है। ऐसे में इन सभी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच करवाई जाए।
- राजस्थान में सरकारी नौकरियों में बाहरी राज्यों के युवाओं को तरजीह मिल रही है। जिसकी वजह से ही प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार का संकट पैदा हो गया है। ऐसे में प्रदेश में सरकारी नौकरियों में प्रदेश के युवाओं को ही 95% तक आरक्षण दिया जाए।
- 28000 CHA संविदा कर्मियों को फिर से नौकरी पर बहाल किया जाए। इसके साथ ही सभी सरकारी विभागों में रिक्त चल रहे लाखों पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
- राजस्थान में भर्ती परीक्षा के दौरान दूसरे राज्यों की फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसे रोकने के लिए प्रभावी रणनीति के तहत कार्रवाई की जाए।