राजस्थान विधानसभा चुनाव में सीटों के मुकाबले दस गुना अधिक उम्मीदवार मैदान में डटे हुए हैं। प्रदेश की 200 सीटों पर 2096 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा।
इनमें से करीब 540 उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए हैं, जिनमें कोई मुख्य बागी शामिल नहीं हैं। अकेले जयपुर जिले में 19 सीटों पर 303 प्रत्याशी मैदान में डटे हुए हैं।
चूरू सीट से बसपा उम्मीदवार जगदीश मेघवाल की मौत हो जाने के कारण अब इस सीट पर चुनाव टल गया है। अब 1 दिसम्बर को 199 सीटों पर मतदान होगा। पिछले चुनाव में कुल सीटों पर करीब 2194 प्रत्याशियों ने हाथ आजमाया था।
बुजुर्गों का बोल-बाला
कांग्रेस-बीजेपी के अलावा अन्य पार्टियों के प्रत्याशियों और निर्दलीय उम्मीदवारों में बुजुर्गों का बोलबाला है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की युवाओं को टिकट देने की बात यहां विफल हो गई है और भाजपा से अधिक बुजुर्ग उम्मीदवार कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे हैं।
चुनावी मैदान में 84 प्रत्याशियों की उम्र 70 साल से अधिक है। कांग्रेस के सबसे बुजुर्ग उम्मीदवार लाडनूं सीट से लड़ रहे कृषि मंत्री हरजीराम बुरडक 84 वर्ष हैं। वहीं भाजपा से तारानगर सीट से लड़ रहे जयनारायण 80 वर्ष के हैं।
कांग्रेस के सबसे युवा प्रत्याशी खंडेला सीट से 25 साल के गिरिराज सिंह हैं, तो भाजपा ने 26 वर्षीय ललित मीणा को किशनगंज सीट से टिकट दिया है।
आयु वर्ग ---------- कांग्रेस ---------- भाजपा ---------- अन्य
70-84 ---------- 18 ---------- 13 ---------- 53
46-69 ---------- 136 ---------- 137 ---------- 976
25-45 ---------- 46 ---------- 50 ---------- 1067
70 सीटों पर हार-जीत बागियों के हाथ
नाम वापसी के बाद राजस्थान में 69 ऐसी सीटें हैं, जहां जीत-हार का फैसला बागियों के हाथों में हैं। भाजपा की 34 ऐसी सीटें हैं, जहां बागी मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस की 29 सीटें हैं। इन्हें छोड़कर छह सीटें ऐसी हैं, जहां दोनों ही दलों के बागी ताल ठोंक रहे हैं। इस बार 168 महिलाएं चुनाव मैदान में हैं।
बागियों की चुनौती को लेकर सबसे ज्यादा मंडावा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रभान घिरे हैं, जहां उनकी पार्टी की विधायक रीटा चौधरी चुनाव मैदान में डटी हुई हैं। कांग्रेस के बागी राज्य मंत्री राजकुमार शर्मा व भाजपा की बागी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व राजस्थान विधानसभा में पहली महिला अध्यक्ष के रूप में अपना नाम दर्ज करवाने वाली सुमित्रा सिंह मुख्य हैं।