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मोदी के बजट से बचेंगी सैकड़ों जिंदगियां?

Sat, 12 Jul 2014 07:54 AM IST
समीर शर्मा/अमर उजाला, जयपुर
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मोदी सरकार का बजट राजस्थान के स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित हो सकता है। तम्बाकू उत्पादों पर कर 11 से बढ़ाकर 72 प्रतिशत करने से राजस्थान में तम्बाकू सेवन करने वालों की संख्या में तेजी से गिरावट आ सकती है।
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सैकड़ों लोग अकाल मौत का ग्रास बनने से बच सकेंगे। राजस्थान के 32 प्रतिशत लोग तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहे हैं। प्रतिवर्ष लगभग 72 हजार राजस्थानी तंबाकू जनित रोगों के कारण समय से पहले मौत की शिकार हो जाती है।

जॉन हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अध्ययन के तहत प्रदेश के तंबाकू नियंत्रण संगठनों की ओर से किए गए आंकलन के मुताबिक इस बजट के बाद राजस्थान में 3.40 लाख जिंदगियां सुरक्षित हो सकती हैं।
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इनमें से 2 लाख जिंदगियां बीड़ी पीने वालों की होंगी। तंबाकू उपभोग से राज्य में होने वाली अकाल मौतों में 2.3 प्रतिशत की गिरावट भी आ सकती है।
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युवा वर्ग पर लग सकेगा अंकुश

राजस्थान में किशोरों में तंबाकू का सेवन शुरू करने की औसत आयु 17 साल है, जबकि किशोरियों में यह आयु मात्र 14 साल है।

राजस्थान के जनसंगठनों, चिकित्सकों एवं सभी स्वास्थ्य पैरवीकर्ताओं को उम्मीद है कि राजस्थान सरकार भी कम से कम 75 प्रतिशत तक तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाएगी।

राजस्थान वालंटरी हैल्थ एसोसिएशन के परियोजना निदेशक विक्रम सिंह राघव ने बताया कि बढ़ी हुई कीमतें युवा वर्ग को तंबाकू सेवन शुरू करने से रोकती हैं।

राजस्थान वालंटरी हैल्थ एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक सत्येन चतुर्वेदी ने बताया कि कर वृद्धि के बाद राज्य सरकार को भी बढ़-चढ़कर प्रयास करने होंगे।

तंबाकू पर कर से होने वाली राजस्व आय से राज्य सरकार को तंबाकू नियन्त्रण के लिए राशि उपलब्ध हो सकेगी। सरकार को इस आय का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा राज्य में तंबाकू नियंत्रण के लिए जन जागरूकता पर खर्च करना चाहिए।
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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने चेताया था

तम्बाकू पर कर के लिए पूर्व में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर बताया था कि देशभर में तम्बाकू सेवन से स्वास्थ्य व्यय बढ़ता जा रहा है। उन्होंने तम्बाकू उत्पादों पर कर बढ़ाने की मांग की थी।

राजस्थान के आंकड़ों के तहत धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की औसत आयु धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति की तुलना में 22 से 26 प्रतिशत तक घट जाती है। गम्भीर यह है कि प्रतिदिन करीब 250 नए तंबाकू उपभोक्ता तैयार होते हैं।

बजट में कर बढ़ते ही कुछ लोगों ने आलू-प्याज की तरह अब तम्बाकू उत्पादों को स्टोर कर लिया है। बाजार में कमी बनाकर महंगे दामों पर बेचने की मंशा से कारण तम्बाकू उत्पादों का अभाव पैदा किया जा रहा है।

जयपुर में भी यही खेल चल रहा है। बजट में तम्बाकू, पान मसाला उत्पादों पर कर 11 से 72 प्रतिशत करने की घोषणा के साथ ही जयपुर के बाजारों में इन उत्पादों का ब्लैक आउट होने लगा है। विक्रेताओं ने ब्लैक आउट कर दिया। तलबगार एक से दूसरी दुकान और थड़ी-ठेलों पर चक्कर लगाते रहे।
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