दौसा सर्किट हाउस में उस वक्त बिजली अचानक गुल हो गई, जब प्रदेश कांग्रेस सरकार के मंत्री टिकट दावेदारों से आवेदन लेने सर्किट हाउस में मौजूद थे। लेकिन बिजली निगम के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
दरअसल, कांग्रेस पार्टी और सरकार के विधानसभा चुनाव पर्यवेक्षक मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, राज्य मंत्री धीरज गुर्जर दौसा सर्किट हाउस में पांचों विधानसभा क्षेत्र के टिकटार्थियों के आवेदन लेने के लिए सर्किट हाउस आए हुए थे। अचानक बिजली गुल हो गई और करीब आधे घंटे तक मंत्री कागजों से हवा करते नजर आए।
इस दौरान मंत्री ममता भूपेश और मंत्री मुरारीलाल मीणा सहित विधायक जीआर खटाणा और कांग्रेस के सैकड़ों नेता, कार्यकर्ता मौजूद थे। लेकिन दौरान सर्किट हाउस की बिजली करीब 30 मिनट तक बंद रही। मंत्री ममता भूपेश तो कागज से ही पंखी झेलती हुई और अपनी हवा करती हुई नजर आईं।
मंत्री बड़े या अधीक्षण अभियंता? जो फोन तक नहीं उठाते...
ये तो रही बात राजस्थान के वीवीआईपी लोगों की। लेकिन वो लोग क्या करें, जो जन सामान्य हैं। दौसा शहर का आलम यह है कि यहां किसी भी वक्त कई घंटे के लिए बिजली गायब हो जाती है, और जिम्मेदार लोग फोन तक उठाना, अपनी ड्यूटी का हिस्सा नहीं मानते हैं। ऐसे में अब आम आदमी जाए तो कहां जाएं, और किसको अपनी पीड़ा बताए। मंत्रियों अपने साथ हुआ वाकया वाक्य देख कर शायद समझ गए होंगे कि उनकी मौजूदगी में जब बिजली नहीं है, तो आम जनता का क्या हाल होता होगा।
दौसा में जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधीक्षण अभियंता रामहेत मीणा ने मौजूदा सरकार के मंत्रियों, विधायकों, जिला प्रमुख, जनप्रतिनिधि सहित अधिकारी की भी नहीं सुनी, जिसके चलते सर्किट हाउस में मौजूद मंत्री कागजों से अपनी हवा करते नजर आए। हद तो तब हो गई जब अधीक्षण अभियंता रामहेत मीणा ने सर्किट हाउस मैनेजर सहित मंत्रियों के पीएसओ के फोन तक नहीं उठाये और सभी मंत्री और कार्यकर्ता एक-दूसरे से बिजली गुल होने की जानकारी लेते रहे। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि दौसा बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता रामहेत मीणा बड़े हैं या राजस्थान सरकार के वो मंत्री, जो आज सर्किट हाउस में मौजूद रहे और बिजली गुल होने के चलते कागजों से हवा करते नजर आए।